जयपुर. राजधानी में जौहरी बाजार स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में मंगलवार को दिनदहाड़े डकैती डालने वाले दूसरे दिन भी पकड़ में नहीं आए। पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। इनके आधार पर डकैतों के जयपुर में ही छिपे होने की संभावना है। इसके मद्देनजर चारदीवारी क्षेत्र के घर-घर तलाशी व सर्वे शुरू कर दिया गया है। नाकाबंदी दूसरे दिन भी जारी रही। होटलों व धर्मशालाओं में भी तलाशी ली गई।
जयपुर रेंज प्रथम आईजी पी.के. सिंह व एसपी (उत्तर) एच.जी. राघवेंद्र सुहासा ने बताया कि दो डकैतों के स्कैच जारी करने के बाद पुलिस के पास जनता से कई सूचनाएं पहुंची हैं। कुछ लोगों ने बताया है कि उन्होंने डकैतों को रुपयों से भरे थैलों सहित हवामहल के सामने देखा था। वहां से वे कैसे और किधर गए, इस बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। सुहासा के अनुसार पुलिस को और भी कई सुराग व जानकारियां मिली हैं, पर उनका खुलासा डकैतों के गिरफ्त में आने से पहले नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से डकैतों को फरार होने में मदद मिल सकती है।
तीन डकैतों के नहीं बन पाए स्कैच
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में मंगलवार को डकैती डालने वाले 5 अपराधियों में से 3 के स्कैच बुधवार को भी नहीं बन पाए। जयपुर रेंज प्रथम आईजी पी.के.सिंह ने बताया कि मंगलवार को दो डकैतों के स्कैच बनवाए गए थे। ये दोनों स्कैच बैंक ग्राहकों द्वारा बताए गए हुलिए के आधार पर बनाए गए हैं।
पुलिस के अनुसार बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्कैच के मामले में कोई सहयोग नहीं दिया। हुलिए के बारे में उनसे पूछताछ करने पर वे यही कहते रहे कि हमने डकैतों की शक्ल ठीक ढंग से नहीं देखी अथवा घबराहट में चेहरा भूल गए हैं। यही कारण है कि तीन अन्य डकैतों के सही स्कैच बनाने में दिक्कत आ रही है।
प्रदेशभर में बैंकों की सुरक्षा बदहाल
जयपुर में दिनदहाड़े हुई बैंक डकैती ने प्रदेश के बैंकों में सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। भास्कर ने बुधवार को प्रदेशभर में बैंकों का जायजा लिया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अधिकांश बैंकों में क्लोज सर्किट कैमरे और सुरक्षा गार्ड नहीं थे। जहां सीसी कैमरे लगे हैं, उनमें से अधिकांश खराब हैं।
अजमेर : यहां निजी बैंकों की सुरक्षा क्लोज सर्किट कैमरों और निजी सुरक्षा गार्डे के भरोसे दिखी, वहीं राष्ट्रीयकृत बैंकों में सुरक्षा व्यवस्था इक्का-दुक्का सुरक्षा गार्डे और सायरनों के हवाले है। पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा की चेस्ट ब्रांचों और इन बैंकों की कुछ शाखाओं को छोड़ दें, तो ज्यादातर में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
अलवर : अधिकांश बैंकों में एक-एक ही सुरक्षा गार्ड तैनात है, वह भी दिन में ही ड्यूटी देता है। वह अवकाश पर चला जाए तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं। राजस्थान ग्रामीण बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक शाखाओं में तो एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं है।
बांसवाड़ा : बांसवाड़ा और डूंगरपुर की अधिकांश ब्रांचों में सुरक्षा गार्ड नहीं हैं। केवल उन बैंकों में ही सुरक्षा गार्ड हैं जहां आरबीआई का पैसा रखा होता है। सभी बैंकों के एटीएम में गार्ड नहीं हैं।
गंगानगर : बैंक ऑफ इंडिया, एसबीबीजे तथा यूको बैंक की शाखाओं में गार्ड तैनात नहीं थे। किसी भी बैंक में सीसी कैमरा नहीं था।
भीलवाड़ा : एसबीबीजे व पंजाब नेशनल बैंक सहित कई बैंकों के एटीएम पर सुरक्षा गार्ड नहीं हैं।
बीकानेर : एक दर्जन बैंक शाखाओं में से केवल तीन में ही क्लोज सर्किट कैमरे लगे हैं।
कोटा : बैंक ऑफ राजस्थान व स्टेट बैंक ऑफ इंदौर की शाखाओं में कोई सुरक्षाकर्मी नहीं है। दोनों बैंकों की सुरक्षा अलार्म सिस्टम के भरोसे है, लेकिन नए कर्मचारियों को इनके बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है।