जयपुर. मध्यप्रदेश की तर्ज पर किसानों को गेहूं के समर्थन मूल्य के साथ सौ रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने के मसले पर राज्य सरकार अभी अधरझूल में है। पिछले दो सप्ताह से यह मामला विचाराधीन है, लेकिन मुख्यमंत्री कोई फैसला नहीं ले सकी हैं।
मध्यप्रदेश में किसानों को गेहूं के समर्थन मूल्य एक हजार रुपए क्विंटल पर बोनस देने के बाद से राजस्थान के सीमावर्ती नौ-दस जिलों के किसान अपना गेहूं मध्यप्रदेश ले जाकर बेच रहे हैं। इससे राज्य में गेहूं के सरकारी खरीद केंद्र सूने पड़े हैं।
राज्य में किसानों को बोनस देने के मामले पर सरकार में व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श हो चुका है। खाद्यमंत्री घनश्याम तिवाड़ी से लेकर मुख्य सचिव के स्तर पर भी चर्चा हो चुकी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के.पांडे दो बार बैठक कर चुके हैं। वित्त विभाग भी अपनी राय दे चुका है। राज्य सरकार ने बोनस की घोषणा से होने वाले लाभ और हानि का भी आकलन कर लिया है।
दूसरी ओर राज्य सरकार इस बात का भी इंतजार कर रही है कि केंद्र सरकार इस बार देश में गेहूं का उत्पादन कम होने की आशंका को देखते हुए समर्थन मूल्य के साथ बोनस की घोषणा कर सकती है।
मंडियों में एक लाख बोरी गेहूं की रोजाना आवक
राज्य की मंडियों में इन दिनों करीब एक लाख बोरी गेहूं की रोजाना आवक हो रही है। मंडियों में गेहूं के भाव 1100 रुपए क्विंटल से ज्यादा चल रहे हैं।
सरकारी खरीद केवल 13 हजार क्विंटल
प्रदेश में मंगलवार तक केवल 13 हजार 447 क्विंटल गेहूं की सरकारी खरीद हुई है। दूसरी ओर से मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद का आंकड़ा दो लाख क्विंटल से ऊपर चला गया है।
बोनस के संबंध में इस मसले पर कुछ कहा नहीं जा सकता। फैसला मुख्यमंत्री को करना है। बोनस के संबंध में गुण-अवगुण का आकलन किया गया है।
—डी.सी.सामंत, मुख्य सचिव
फायदा >>
>> बोनस देने से रबी के सीजन में हुए फसली नुकसान को देखते हुए किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा।
>> राज्य सरकार को राजनीतिक लाभ भी मिलने की संभावना।
नुकसान >>
>> बोनस देने से हरियाणा, पंजाब एवं उत्तरप्रदेश का गेहूं राज्य में आने की आशंका।
>> राज्य में गेहूं की सरकारी खरीद व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। राज्य में 5 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय कर इसके अनुसार व्यवस्थाएं की गई हैं।
>> बोनस देने से गेहूं के भाव के साथ महंगाई बढ़ने का भी खतरा है।