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‘कर्जदार की मृत्यु पर ऋण होगा माफ’

जयपुर. rajउद्योगमंत्री डॉ. दिगंबर सिंह ने कहा कि राजस्थान वित्त निगम (आरएफसी) से ऋण लेने वाले मूल प्रवर्तक की अगर मृत्यु हो चुकी है और उसका कोई वारिस नहीं है या उसकी कोई संपत्ति नहीं है तो सारा ऋण समाप्त कर दिया जाएगा। इसके अलावा किसी के वारिस या गारंटर बीपीएल श्रेणी में हैं तो भी ऋण माफ कर दिया जाएगा।

राजस्थान वित्त निगम के 54वें स्थापना दिवस पर यहां हुई ‘गुड बोरोवर्स मीट’ में उद्योगमंत्री ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार ने प्रदेश में औद्योगिक माहौल बनाने के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित की हैं। राज्य में ज्यादा से ज्यादा उद्योग पनपें, इसके लिए सरकार उन्हें वित्तीय सहायता, ट्रांसपोर्टेशन, पानी-बिजली एवं जमीन की सुविधा उपलब्ध करा रही है।

सिडबी के उप प्रबंध निदेशक राकेश रेवारी ने कहा कि आज पार्टनरशिप का जमाना है। भविष्य में हमें बोरोवर्स के पीछे भागना पड़ेगा। पार्टनरशिप मॉडल को बढ़ावा देकर छोटे जिलों में औद्योगिक विकास करने की जरूरत है। उन्होंने आरएफसी को वित्तीय सहयोग के साथ टेक्नोलॉजी एवं ट्रेनिंग सहयोग का आश्वासन दिया।

उद्योग विभाग के प्रमुख शासन सचिव अशोक संपतराम ने कहा कि भविष्य में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इसके लिए निगम को नई योजनाएं, नए सेक्टर और नए टारगेट ग्रुप देखने होंगे। आरएफसी के सीएमडी बी.एन. शर्मा ने कहा कि गुड बोरोवर्स योजना के तहत निगम ने अब तक 3200 औद्योगिक इकाइयों को ऋण सुविधा दी है। वर्ष 2002-03 में निगम ने 91 लाख रुपए का मुनाफा कमाया था, जो 06-07 में बढ़कर 15 करोड़ पहुंच गया है। निगम का व्यवसाय भी 756 करोड़ से बढ़कर 940 करोड़ रुपए हो गया है। राज्य में अब तक 77 हजार इकाइयों को साढ़े चार हजार करोड़ रुपए के ऋण वितरित किए गए हैं। कार्यकारी निदेशक पवन अरोड़ा ने प्रजेंटेशन के जरिए निगम के कामकाज की जानकारी दी।

इनलैंड कंटेनर डिपो का काम सौंपने की जांच होगी

राजसिको की ओर से कस्टम की काली सूची में दर्ज एक व्यक्ति की फर्म को राज्य के चार इनलैंड कंटेनर डिपो का काम सौंपने की जांच कराई जाएगी। उद्योग मंत्री डॉ. दिगंबरसिंह ने यहां आरएफसी के कार्यक्रम में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस संबंध में शिकायतें मिलने पर मुख्य सचिव को जांच कराने के लिए कहा गया है। इस मामले में गड़बड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आरोप है कि राजसिको ने कुछ समय पहले जयपुर, जोधपुर, भिवाड़ी एवं भीलवाड़ा के इनलैंड कंटेनर डिपो के ट्रांसपोर्टेशन एवं फॉरर्व्िडग एजेंट का काम एक ऐसी फर्म को सौंप दिया, जिसका मालिक कस्टम विभाग की काली सूची में दर्ज है। यह व्यक्ति सीबीआई की ओर से एक बार पकड़ा भी जा चुका है।





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