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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur कोरबा. एसईसीएल के विरुद्ध बार-बार हो रहे आंदोलन को मुख्यमंत्री के ध्यान में लाने एवं वास्तविकता से अवगत कराने पर संभवत: उक्त बैठक रखी गई है। कोयला खदानों के लिए जमीन कम पड़ती जा रही है। उत्पादन कार्यो में पेरशानी आ रही है वहीं निजी कंपनी के मामले में सभी कार्य तत्परता से निपटाये जाते हैं जब एसईसीएल का प्रकरण सामने आता है पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है जबकि एसईसीएल द्वारा शासन-प्रशासन से सुझाये गये कार्यो पर बराबर भागीदारी दी जाती है। कोरबा जिले की सड़कों पर ३२ करोड़ रूपए खर्च किये जा रहे है, क्योंकि एसईसीएल से जुड़े वाहन भी मार्ग से आते जाते हैं।
इसी बहाने क्षेत्र के सड़कों की हालत सुधर जाती है वहीं निजी कंपनियां इन कायरें पर ध्यान नहीं देती बावजूद इसके एसईसीएल के किसी भी मामले में रुचि नहीं ली जाती है। सरायपाली खदान हेतु भूमि अधिग्रहण का कार्य ३ साल से चल रहा है। अब तक एसईसीएल को जमीन नहीं मिल पाई है। आगे अम्बिका एवं करतली खदान खुलनी है। मानिकपुर, गेवरा-दीपका, कुसमुंडा खदान का विस्तार किया जाना है।
जमीन उपलब्ध नहीं होने से आगे चलकर उत्पादन में कठिनाई आएगी जब हरदीबाजार में चक्काजाम आंदोलन चला, शासन द्वारा मामले में एसईसीएल से पूछताछ की गई थी। सड़क बनाने के निर्देश दिये गये जिस पर शासन का ध्यान सड़क की सच्चई सहित अन्य मुद्दों की ओर आकृष्ट कराया गया था।
मुख्यमंत्री द्वारा बारी-बारी उद्योग एवं अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की बैठक ली जा रही है। हो सकता है इस सबको लेकर मुख्यमंत्री द्वारा 10 अप्रैल को राजधानी में बैठक बुलाई गई है। बैठक में किये गये सामुदायिक विकास की सूची तो प्रस्तुत की ही जाएगी जमीन की आवश्यकता से भी उन्हें अवगत कराया जाएगा क्योंकि इसके बिना खदानें आगे नहीं बढ़ सकती। महानदी कोल फील्ड उड़ीसा में इसलिए तरक्की कर रहा है क्योंकि शासन द्वारा उसे जमीन आसानी से उपलब्ध करायी जा रही है।