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1857 की क्रांति में राजस्थान की भूमिका

बीकानेर. राजस्थान की रियासतों में 1857 की क्रांति में विद्रोह कैसे हुआ और उसे किस प्रकार कुचला गया था। तांत्या टोपे कब और किस रास्ते बीकानेर आए थे। कहां ठहरे और किस-किस से मिले। इसका सचित्र प्रदर्शन राजस्थान राज्य अभिलेखागार विभाग करने जा रहा है।

अभिलेखागार विभाग के मूल अभिलेखों को खंगाल कर सामग्री एकत्र की गई है। सामग्री से यह पुष्ट होता है कि 1857 की क्रांति में राजस्थान की महती भूमिका रही है। स्थानीय लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्स लिया था। रियासतों में भी जबरदस्त विद्रोह हुआ था। इसके सुबूत अभिलेखागार विभाग के पास हैं। तथ्यों के मुताबिक नानाजी पेशवा पर 50 हजार रुपए का जुर्माना, कुछ अन्य क्रांतिकारियों पर भी सौ से एक हजार रुपए तक का जुर्माना रखा गया था। अंग्रेजी हुकूमत के वे आदेश भी प्रदर्शनी में प्रस्तुत किए जाएंगे।

बीकानेर में यह प्रदर्शनी मई में आयोजित की जाएगी। इससे पहले 22 से 25 अप्रैल को अजमेर व एक से तीन मई तक जोधपुर में प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा जबकि जयपुर, कोटा व उदयपुर में प्रदर्शनी का आयोजन किया जा चुका है। राजस्थान राज्य अभिलेखागार विभाग के निदेशक डॉ.महेन्द्र खड़गावत ने बताया कि क्रांति का मुख्य केन्द्र कोटा व अहुवा था।

अहुवा में एक अंग्रेज अधिकारी को फांसी पर चढ़ा दिया गया था। इसके चित्र विभाग के पास हैं। उदयपुर में भी क्रांति को दबाने का प्रयास किया गया था। हिंदू व मुसलमानों ने मिलकर क्रांति का बिगुल बजाया था। इसके अलावा भी ऐसी सामग्री है जिसकी लोगों को जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि क्रांति के डेढ़ सौ वर्ष पूरे होने पर पूरे प्रदेश में प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है ताकि लोगों को यह मालूम हो सके कि कितने संघर्ष के बाद देश को आजादी मिली। खड़गावत ने बताया कि प्रदर्शनी के दौरान नाथूराम खड़गावत की ओर से 1857 की क्रांति पर लिखी एक पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा।





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