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बैंकों का पहला चैनल ही कमजोर

बीकानेर. ‘भास्कर’ ने बीकानेर की बैंकों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की पड़ताल की तो कई खामियां नजर आई। सार्वजनिक क्षेत्र की एसबीबीजे और पीएनबी बैंक में जहां क्लोज सर्किट टीवी लगे हुए थे वहीं बाकियों में सुरक्षा का जिम्मा एक अदद गार्ड के भरोसे था।

अधिकतर बैंकों में जो गार्ड लगे हुए है, उनकी फिजिकल स्थिति भी ऐसी नहीं है कि वे अचानक हुए हमले का जवाब दे सके। सरकारी की तुलना में निजी बैंकों में सुरक्षा व्यवस्था अधिक पुख्ता थी। लगभग बैंकों में एक की बजाय दो-दो सुरक्षाकर्मी तैनात थे। साथ ही बैंक के अंदरूनी परिसर में क्लोज सर्किट टीवी भी लगे हुए थे। हालांकि इन क्लोट सर्किट टीवी कैमरों की मोनीटरिंग अधिकतर बैंक में नियमित नहीं होती। अधिकतर बैंकों के प्रबध्ांन की सोच है कि अगर चोरी हो गई तो भी क्या, टीवी कैमरों में चोर की शक्ल तो आ ही जाएगी। पुलिस पकड़ लेगी। शहर के सबसे व्यस्ततम केईएम रोड पर आधा दर्जन से अधिक बैंक हैं। इसके अलावा स्टेशन रोड, रानीबाजार, आम्बेडकर सर्किल, पब्लिक पार्क,सादरूलगंज में निजी और सार्वजनिक बैंक खुले हुए है।

बुधवार को जब बैंकों में सुरक्षा संबंधी पड़ताल करने भास्कर टीम पहुंची तो दो बैक प्रबंधन ने सावधानी बरती और टीम के सदस्यों से पहचान पत्र के बारे में पूछा जबकि बाकियों ने तो सीधी ही बैंक की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दे दी। जिन बैंकों ने इस बारे में सजगता दिखाई उसमें एक निजी और एक सरकारी बैंक शामिल है। अगर बैंकों की यही व्यवस्था रही तो कोई भी राह-चलता बैंक की जानकारी ले सकेगा। पब्लिक पार्क स्थित एक बैंक की शाखा में तो सुरक्षा का जिम्मा केवल एक गार्ड के भरोसे था जबकि दूसरा गार्ड ऊपरी ब्लाक में था। नियमानुसर प्रत्येक बैंक में आपातकालीन स्थिति में सूचना देने के लिए महत्वपूर्ण फोन नम्बर अंकित होने चाहिए मगर केवल एक ही बैंक में यह व्यवस्था मिली।





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