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गुरु के ‘गुरु’ कहां

बीकानेर. teacherराज्य में बीएड कॉलेजों की संख्या तो बढ़ रही है लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए एमएड योग्यताधारी स्टाफ की भारी कमी है। राज्य में इस वर्ष बीएड की सीटें बढ़कर 90 हजार होने की संभावना है। इन्हें पढ़ाने के लिए छह हजार एमएड योग्यताधारियों की जरूरत होगी। जबकि राज्य में एमएड की सीटें 625 ही है। गत वर्ष 415 थी। स्थिति यह है कि बीएड कॉलेज के व्यवस्थापकों को एमएड योग्यताधारी मिलते ही नहीं है।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के मनदंडों के अनुसार 15 बीएड शिक्षार्थियों पर एक प्रशिक्षक होना चाहिए साथ ही बीएड को पढ़ाने वाले की योग्यता एमएड होनी चाहिए।

हालात यह है कि एनसीटीई के निरीक्षण के लिए एक-एक एमएड योग्यता वालों के नाम तीन-चार कॉलेजों में लिखवा दिए जाते हैं। एनसीटीई के मानदंडानुसार बीएड कॉलेज के प्राचार्य की योग्यता शिक्षा में पीएचडी होनी चाहिए। जबकि राज्य में एक वर्ष में दस व्यक्ति भी शिक्षा में पीएचडी नहीं कर पाते हैं और आवश्यकता 900 की है। राज्य में शिक्षित व्यक्ति जम्मू, कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश राज्यों में जाकर बीएड कर रहे हैं। नए कॉलेज खुलने से इन्हें राज्य में ही अवसर मिलेगा लेकिन बिना शैक्षिक व्यवस्था के बीएड कॉलेज खोलने से शिक्षा की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

छूट से भी नहीं चल रहा काम

निजी बीएड कॉलेज के संचालकों ने एनसीटीई के जयपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को पिछले वर्ष इस समस्या से अवगत करवाया था तथा एमएड और पीएचडी योग्यताधारी स्टाफ उपलब्ध करवाने का आग्रह किया था। एनसीटीई ने एमएड नहीं मिलने पर बीएड योग्यताधारकों से पढ़ाने तथा एमएड को प्राचार्य रखने की छूट दे दी थी। गत वर्ष 535 बीएड कॉलेजों के लिए एमएड योग्यताधारी स्टाफ नहीं मिला था तो अब 900 के लिए कैसे मिलेगा। यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

एनसीटीई का गठन भारत की संसद ने किया था। बिना संसद की अनुमति के योग्यता में छूट देने का अधिकार एनसीटीई को नहीं है। संगठन ने राज्य सरकार एवं केन्द्रीय संसदीय सचिव को इस संबंध में पत्र भी लिखा है।
-महेन्द्र पांडे, महामंत्री, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ

यह एक बड़ी समस्या है। एमएड योग्यताधारी मिलते ही नहीं है। निजी बीएड संस्थाओं को मजबूरी में बीएड शिक्षक ही रखने पड़ते हैं। हालांकि एमए में निर्धारित प्रतिशत अंक या पांच-दस साल के अनुभवी बीएड डिग्रीधारक को बीएड की कक्षाएं लेने का अधिकार है।
-नारायण दास व्यास, संचालक बेसिक बीएड कॉलेज





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