कोटा. जिन व्यापारियों ने अभी तक रिफंड का क्लेम नहीं किया है और यदि उन्हें जल्दी क्लेम लेना हैं, तो वे दस्तावेजों की जांच से पूर्व बैंक गारंटी देकर भी रिफंड क्लेम कर सकते हैं।
वाणिज्यिक कर विभाग की व्यवस्था के मुताबिक, अप्रैल 2006 में लागू वैट एक्ट के अनुसार रिफंड का क्लेम दो वर्ष बाद मिलना है। इस वर्ष व्यापारी रिफंड का क्लेम कर रहे हैं। वैट एक्ट में प्रावधान है कि करदाता व्यापारी स्वयं कर निर्धारक होता है।
क्लेम से पूर्व विभाग इस बात की जांच करता है कि व्यापारी ने जो कर निर्धारण किया है वह सही है या गलत है। विभाग इस समय व्यापारियों असेसमेंट की जांच कर रहा है। यदि स्कूटनी में किसी का रिफंड बनता है और उसने दावा किया है तो वह इसका हकदार है।
वैट और केन्द्रीय बिक्री कर (सीएसटी) की दर में अंतर से अन्तरराज्यीय बिक्री करने वाले व्यापारियों के रिफंड निकलते हैं। राज्य में अधिकांश आइटम पर 4 प्रतिशत वैट है, तो कुछ आइटम पर 12.5 प्रतिशत। सेंड स्टोन पर 90 रुपए टन की दर से वैट लागू है, जबकि केन्द्रीय बिक्री कर की दर 3 प्रतिशत है। ऐसेमें अंतरराज्यीय बिक्री से वैट के अलग-अलग अंतर के कारण रिफंड निकलता है।
यहां से धनिया, मेथी, गेहूं, सरसों एवं सोयाबीन की अन्तरराज्यीय बिक्री होती है। इन सब पर चार प्रतिशत वैट है, जबकि सीएसटी तीन प्रतिशत है। व्यापारी जो राज्य के बाहर माल की बिक्री करते हैं, रिफंड के हकदार हैं।’
—अविनाश राठी, सचिव, ग्रेन एंड सीड्स मर्चेन्ट्स एसोसिएशन
हमने सर्किल में रिफंड के लिए क्लेम कर रखा है। सेंड स्टोन व्यवसायियों का 4 लाख प्रति व्यापारी के हिसाब से करीब ढाई करोड़ रुपए रिफंड बनता है।
—उत्तम अग्रवाल, अध्यक्ष,सेंड स्टोन विकास मर्चेन्ट समिति
अभी तक विभाग के पास किसी के भी रिफंड के क्लेम नहीं आए हैं। किसी व्यापारी को ज्यादा जल्दी है तो जांच से पूर्व बैंक गारंटी देकर रिफंड का क्लेम कर सकते हैं।’
—जमील अहमद कुरैशी,वाणिज्यिक कर उपायुक्त