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Shekhawati Shekhawati सीकर.
संकल्प यात्रा का आगाज करने बुधवार को शेखावाटी पहुंची मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लोगों के जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री के नीमकाथाना को जिला बनाने की घोषणा नहीं करने से सभा में आए लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने उपलब्धियां नहीं सुनने की बात कहते हुए सरकार विरोधी नारेबाजी की। मामला इतना बिगड़ गया कि मुख्यमंत्री को बीच में ही भाषण रोकना पड़ा।
भीड़ को शांत करने के लिए सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजेन्द्र राठौड़ व आईजी बीआर ग्वाला को उसके बीच जाना पड़ा। महावीर चक्र विजेता दिगेंद्र सिंह को भी भीड़ कंट्रोल करने के लिए कहा गया। खंडेला में भी किसान सभा के कार्यकर्ताओं ने बस स्टैंड पर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
धौंस से कुछ नहीं मिलेगा : वसुंधरा
विरोध से उखड़ी मुख्यमंत्री ने तीखे तेवर दिखाते हुए कांग्रेस पर प्रहार करते हुए सवाल किया कि क्या कांग्रेस वाले नीमकाथाना को जिला बनाएंगे? उन्होंने चेताया कि धौंस से कुछ नहीं मिलेगा। प्रेम से सब मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सात जिले बनने की लाइन में हैं। हर जगह जिला बना दें क्या? ऐसा होता है क्या? मुख्यमंत्री ने कहा कि नए परिसीमन के बाद इस मामले में कमेटी गठित कर दी गई है। उसकी रिपोर्ट के बाद ही इस पर कोई निर्णय होगा।
विकास के नए आयामों का दावा
सीकर के नीमकाथाना से संकल्प यात्रा की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बीते चार साल में राज्य सरकार ने राज्य में विकास के नए आयाम छुए हैं। अब प्रयास किया जाएगा कि आने वाले पांच सालों में राज्य को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जाए। कांग्रेस पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि गहलोत शासन में हमेशा खजाना खाली होने का राग अलापा जाता था, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। सरकार विकास में कई मील के पत्थर तय कर चुकी है। इस दिशा में पैसे की कमी नहीं आने दी जाएगी।
रूपांतरण शुल्क में 50 फीसदी तक कमी
कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों में भूखंड का नियमन कराना अब और सस्ता हो जाएगा। सरकार ने राज्यभर में नियमन दरों में 50 फीसदी तक की कमी करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुधवार को शेखावाटी दौरे के समय यह घोषणा की।
चुनावी अभियान पर निकली मुख्यमंत्री ने जनसभाओं में लगभग अपनी बजट घोषणाओं को ही दोहराया। कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के लोगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि 50 हजार तक की आबादी वाले कस्बों में स्थानीय निकायों से कृषि भूमि से आवासीय और व्यावसायिक कनवर्जन कराने पर नियमन शुल्क अब 50 प्रतिशत ही लिया जाएगा। 50 हजार से एक लाख तक की आबादी वाले शहरों में भूखंडधारियों को दो-तिहाई (करीब 67 प्रतिशत) ही नियमन शुल्क देना पड़ेगा। एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में यह दर तीन चौथाई (करीब 75 प्रतिशत) लगेगा।
असर क्या होगा :
मुख्यमंत्री की इस घोषणा को केवल चुनावी स्टंट माना जा रहा है। नियमन में कानूनी अड़चनें इतनी आ रही हैं कि कुछ ही लोग इसका फायदा ले पाएंगे। वन क्षेत्र, डूब क्षेत्र, इकोलॉजिकल जोन, हाउसिंग बोर्ड की अवाप्तशुदा जमीन और नदी नालों में बसी कॉलोनियों का नियमन काफी समय से नहीं हो पा रहा है। इस वजह से अकेले जयपुर में ही करीब 650 कॉलोनियों का नियमन नहीं हो पा रहा है।
फायदा क्या मिलेगा :
निजी खातेदारी और गृह निर्माण सहकारी समितियों की काटी कॉलोनियों के नियमन में भूखंडधारियों को नियमन शुल्क में कुछ फायदा मिलेगा। जयपुर में ऐसी करीब 850 कॉलोनियों का नियमन होना है। रियल एस्टेट से जुड़े लोगों का कहना है कि वास्तविक भूखंडधारियों को कम और भूमाफियाओं को इस घोषणा का लाभ ज्यादा मिलेगा।
घोषणाएं
>> बिजली आपूर्ति में दो प्रतिशत सरचार्ज नहीं लगेगा।
>> 09 तक एक लाख कृषि, 25 हजार विशेष कनेक्शन।
>> फ्लोराइड मुक्ति को 8 हजार करोड़ का अंब्रेला प्रोजेक्ट।
>> शेखावाटी विवि की स्थापना सीकर में होगी।
>> जयपुर से सीकर तक फोरलेन सड़क बनेगी।