bhaskar Web English
HomeNewsMetrosChandigarh Chandigarh

कट्टरवाद की भेंट चढ़ा लाहौर का बसंत फैस्टिवल

अमृतसर लाहौर के मशहूर बसंत फैस्टिवल पर पाबंदी लगा दी गई है। इससे पतंगबाजी के शौकीन लाखों लोग मायूस हैं। प्रशासन ने बसंत को रद्द करने की वजह नागरिकों की सुरक्षा बताई है, जबकि पाकिस्तान के कट्टरवादी संगठन यह कहकर इसका विरोध करते आए हैं कि बसंत हिंदुओं का त्यौहार है, मुसलमानों का इससे कुछ लेना-देना नहीं।

फिल्म निर्माता जहीद अक्कासी का कहना है कि लाहौर वासियों के लिए बसंत का मतलब सिर्फ पतंगबाजी है। इस दो दिवसीय फैस्टिवल के दौरान लाहौर का आकाश रंग बिरंगी पतंगों से ढक जाता है। लोग घरों की छतों पर चढ़ कर पतंगे भी उड़ाते हैं और खाने-पीने के दौर के बीच हंसी-मजाक की महफिलें भी जमती हैं।

पाबंदी की बजाए नागरिकों की होनी चाहिए सुरक्षा

लाहौर काईट फ्लाइंग एसोसिएशन के महासचिव शेख मोहम्मद सलीम ने सरकार के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि यह सही है कि पतंगबाजी के दौरान छतों से गिरकर या तेजधार डोर से कटकर अनेक कीमती जानें चली जाती हैं, मगर सरकार को फैस्टिवल पर पाबंदी लगाने की बजाय नागरिकों की हिफाजत के लिए कदम उठाने चाहिए थे।

उन्होंने बताया कि पहले यह फैस्टिवल 21-22 फरवरी को आयोजित किया जाना था, फिर इस तारीख को बदलकर 15-16 मार्च कर दिया गया और इसके बाद 12-13 अप्रैल के दिन तय किए गए, मगर आखरी मौके पर इस पर पक्की पाबंदी आयद कर दी गई। लाहौर के नाजिम ने ऐलान किया कि पतंगबाजी को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जनता नहीं मानती पाबंदियों को

गौरतलब है कि जनवरी 2005 में एक संगठन ने बसंत को गैर-इस्लामी फैस्टिवल बताते हुए लाहौर हाईकोर्ट में इसके खिलाफ रिट दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने पहले पाबंदी लगाई, फिर लोगों के दबाव में इसे वापिस ले लिया।

2006 और 2007 में भी ऐसे हालात पैदा हुए, मगर जनता ने पाबंदियों का पालन नहीं किया। पिछले साल पतंगबाजी के आरोप में 900 से अधिक लोगों के खिलाफ लाहौर के पुलिस स्टेशनों में भी मामले दर्ज किए गए।

लाखों सैलानी आते हैं फैस्टीवल देखने

काईट फ्लाइंग एसोसिएशन के आयोजक सैयद जुल्फिकार हुसैन का कहना है कि बसंत फैस्टिवल को देखने हर साल हजारों विदेशी सैलानी लाहौर पहुंचते हैं लगभग पांच लाख लाहौरियों की जीविका से जुड़े इस फैस्टिवल से पाकिस्तान को 200 करोड़ रुपए से अधिक की आमदनी होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह रंगीन फैस्टिवल पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान की उदारवादी छवि को भी प्रस्तुत करता है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: