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सामान्य वर्ग के हाथ से निकल गई 4400 सीटें

इंदौर. अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की खबर से जहां विद्यार्थी सीटों के जोड़-घटाव में उलझे और संभावनाएं तलाशते रहे, वहीं संस्थानों में भी अब नए सिरे से कवायद शुरू हो गई है। आईआईएम इंदौर के प्रभारी निदेशक प्रो. तपन पांडा ने बताया सीटों की नई स्थिति पर विचार के लिए संस्थान में शुक्रवार को बैठक होने वाली है।

आरक्षण के मुद्दे पर जारी बहस के चलते 2007-08 के सत्र में सभी आईआईएम ने सीटें बढ़ा दी थीं। आईआईएम इंदौर ने इस साल 60 सीटें बढ़ाई थीं। पूर्व में 180 सीटों के आधार पर 45 सीटें आरक्षित होती थीं। अब यह सीटें बढ़कर 124 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यदि आईआईएम इंदौर में इस साल सीटें नहीं बढ़ती तो लगभग 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो जातीं।

आईआईटी में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए कुल 1000 सीटें, आईआईएम में 400, एनआईटी में 2500, मेडिकल कॉलेज (सीपीएमटी) में 500 सीटों का नुकसान हो सकता है। हालांकि मोइली कमेटी के सुझावों के मुताबिक ओबीसी की सीटें बढ़ाने की लिए सामान्य वर्ग की सीटें कम नहीं की जा सकती है।

आईआईएम (आई) नहीं देगा आरक्षण? सूत्रों के मुताबिक आईआईएम-इंदौर के लिए इस साल एक साथ 27 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना संभव नहीं है। इसके लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

अल्पसंख्यक संस्थान दायरे से बाहर
कोर्ट ने कहा कि यह आरक्षण कानून अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होगा और ऐसे निजी संस्थानों में प्रावधान लागू करने का मुद्दा खुला छोड़ दिया, जिन्हें सरकारी अनुदान नहीं मिलता क्योंकि ऐसे किसी संस्थान ने कानून की वैधता को चुनौती नहीं दी।

अनिश्चितकाल तक नहीं- कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 15 (4) और 15 (5) को वैध ठहराते हुए कहा कि नियमित अंतराल पर आरक्षण नीति की समीक्षा की जाए क्योंकि इसे अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता।

प्राथमिक शिक्षा पर जोर
असहमति जताने वाले जज दलवीर भंडारी ने प्राथमिक शिक्षा मुहैया कराने पर जोर दिया क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत मौलिक अधिकार है।

प्रदेश की परीक्षाओं पर असर नहीं
नए आदेश का प्रदेश स्तर पर होने वाली पीएमटी, पीईटी सहित अन्य परीक्षाओं पर असर नहीं होगा। यहां पहले से ही 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इसमें एससी-एसटी के लिए 36 प्रतिशत और 14 प्रतिशत ओबीसी के लिए आरक्षण है। जानकारों के मुताबिक कोर्ट के आदेश मुताबिक ही राज्य सरकार अधिकतम आरक्षण 50 प्रतिशत ही रहेगा, के नियमों का पालन कर रही है।





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