जयपुर. राज्य में फसली जरूरत का आधा बीज ही उत्पादन होता है। बाकी आधा बीज दूसरे प्रदेशों से खरीदने पड़ता है। इस बार खरीफ में बाजरा, ज्वार, मूंगफली, तिल, सोयाबीन व दलहनी बीजों का संकट रहने की संभावना है।
कृषि विभाग के मुख्य प्रबंधक (विपणन) ए.एन. पाण्डेय ने बताया कि राज्य बीज निगम को खरीफ फसलों के लिए करीब दो लाख क्विंटल बीज की जरूरत है। इसमें से लगभग एक लाख 12 हजार क्विंटल बीज का उत्पादन निगम कर रहा है, जबकि बाकी करीब 88 हजार क्विंटल बीज बाहर से मंगाया जा रहा है। प्रदेश में करीब 5 लाख क्विंटल बीज खरीफ के लिए चाहिए। इसमें से लगभग तीन लाख क्विंटल बीज का किसान अपने स्तर पर घरेलू उत्पादन करते हैं।
किल्लत वाले बीज
बाजरा : राज्य के किसानों को 20 हजार क्विंटल बीज की जरूरत होती है। इसके मुकाबले इस बार करीब 7 हजार क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है। बाकी 13 हजार क्विंटल बीज आंध्र प्रदेश से मंगाया जाएगा।
ज्वार : राज्य में मोटे तौर पर लगभग 4 हजार क्विंटल बीज चाहिए जबकि उत्पादन करीब डेढ़ सौ क्विंटल ही है। बाकी सारा बीज आंध्र प्रदेश से खरीदा जाता है।
मक्का : लगभग 11 हजार क्विंटल बीज की आवश्यकता के मुकाबले केवल ढाई हजार क्विंटल उत्पादन होता है। बाकी बीज की पूर्ति आंध्र प्रदेश से की जाती है।
उड़द : राज्य में करीब 500 क्विंटल बीज होता है। करीब दो हजार क्विंटल बीज आंध्र प्रदेश से मंगाया जाता है।
मोठ : राज्य में बीज का संकट रहता है। जरूरत 11 से 12 हजार क्विंटल की है, लेकिन उत्पादन करीब 4 हजार क्विंटल ही होता है।
मूंगफली : लगभग 20 से 25 हजार क्विंटल की आवश्यकता के मुकाबले राज्य में लगभग आधे बीज का ही उत्पादन होता है। बाकी बीज मंगाने के लिए गुजरात की कंपनियों से बातचीत चल रही है।
तिल : प्रदेश में केवल दस फीसदी उत्पादन होता है। जरूरत एक हजार क्विंटल की, उत्पादन सिर्फ सौ क्विंटल। बाकी बीज गुजरात से मंगाया जाता है।
सोयाबीन : लगभग सवा लाख क्विंटल बीज की जरूरत पूरी करने के लिए 30 हजार क्विंटल से ज्यादा बीज मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश से मंगाया जाता है।
फायदा और नुकसान
किल्लत रहने से किसानों को महंगे दामों पर या घटिया किस्म का बीज खरीदना पड़ता है। बीज घटिया निकलने पर किसान को उत्पादन कम होने की मार सहनी पड़ती है। हाइब्रिड बीजों से पैदावार अच्छी होती है। देसी बीजों के मुकाबले प्रमाणित बीजों से भी अच्छी फसल मिलती है।