जयपुर. उच्च शिक्षण संस्थाओं में 27 फीसदी आरक्षण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आईआईटी की तैयारी करने वाले छात्रों को धक्का लगा है। उनका कहना है कि मेहनत तो उन्होंने की है, लेकिन अब सबकुछ किस्मत पर छोड़ दिया है।
आईआईटी की तैयारी कर रही उदयपुर की कृति जैन ने बताया कि उसके भाई ने टीवी सुनकर जब उसे इस बारे में बताया तो उसे बड़ा धक्का लगा। किसी वजह से एडमिशन नहीं हुआ तो उसका एक साल बिगड़ जाएगा। इस संबंध में अभिभावकों से पूछने पर उन्होंने आश्वस्त किया कि अभी तो फैसला आया है, क्रियान्विति में समय लगेगा। इससे कुछ राहत मिली।
कोटा में आईआईटी की तैयारी में जुटे कविश जैन का कहना है कि अब मेहनत से कुछ नहीं होगा, सबकुछ किस्मत पर निर्भर है। पहले ही प्रतिस्पर्धा बहुत है और आरक्षण बढ़ने से यह और बढ़ जाएगी। आरक्षण की व्यवस्था स्कूल स्तर पर होगी तो ही इसका लाभ मिलेगा। उच्च शिक्षा में आरक्षण बिल्कुल उचित नहीं है।
गुवहाटी के सौरभ जैन ने बताया कि जो होना था, वो हो गया, अभी तो पूरा ध्यान परीक्षा पर है। उसके मित्र संकल्प अग्रवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अपने हाथ में तो कुछ नहीं बचा है। इस फैसले से पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ेगा। इसी परीक्षा की तैयारी कर रहे विकास जैन ने बताया कि यह खबर सुनकर दुख हुआ है, लेकिन अभी तो दो दिन बाद होने वाले पेपर पर ही उसका ध्यान है। इसके बाद इस पर दोस्तों व अभिभावकों के साथ चर्चा करेंगे।
कोटा के अरिहंत जैन ने बताया कि आरक्षण के बाद सामान्य सीटों के लिए देशभर में मात्र साढ़े चार हजार सीटें ही बची हैं। पहली प्राथमिकता तो परीक्षा की तैयारी करना है। प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी। विद्यार्थियों के हाथ में तो कुछ है नहीं। परीक्षा ही सफलता ही एक मात्र लक्ष्य बचा है। केकड़ी, अजमेर के रवींद्र कुमार ने बताया कि इससे धक्का तो लगा है, लेकिन सभी लोग अभी पढ़ाई में व्यस्त हैं।