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गोदाम पैक, लाखों क्विंटल चावल जाम

भाटापारा/महासमुंद. चावल से भर गए सीडब्लूसी और राज्य भंडार गृह निगम के गोदामों के कारण पूरे राज्य में धान की कस्टम मिलिंग ठप हो गई है। अपेक्स और निजी राइस मिलों में 10 लाख क्विंटल से ज्यादा चावल जाम है।

पिछले साल तक नागरिक आपूर्ति निगम गोदामों में तीन महीने की जरूरत लायक चावल का स्टाक रखता था। तीन रुपए किलो में गरीबों को चावल देने की योजना और केंद्र शासन द्वारा राज्य को दिए जाने वाले चावल के कोटे में कटौती के बाद राज्य शासन ने दिसंबर तक की खपत के हिसाब से चावल भंडारण का फैसला कर लिया। मुश्किल यही है कि इतने चावल का भंडारण करने लायक गोदाम ही प्रदेश में नहीं हैं। सामान्य रूप से हर महीने एक लाख टन चावल प्रदेश में खपता है। मार्कफेड ने किसानों से करीब 30 लाख टन धान समर्थन मूल्य पर खरीदा है, लेकिन उसके पास आज की स्थिति में कुल भंडारण सुविधा 8 से 10 लाख टन की है।

राज्य भंडार गृह निगम के अधिकृत सूत्रों ने स्वीकार किया है कि सारे गोदाम भर चुके हैं। रायपुर, दुर्ग, महासमुंद समेत कई जिलों में चावल भंडारण की समस्या ज्यादा है। सीडब्लूसी, एसडब्लूसी के गोदामों के सामने वाहनों की कतार लगी है। कई जगह वाहन हफ्ते भर से अनलोडिंग के इंतजार में खड़े हैं। भाटापारा ब्लाक में ही राइस मिलों के पास एक लाख क्विंटल से ज्यादा चावल जाम है। यहां की अपेक्स मिल में मिलिंग गत 30 मार्च से बंद है, क्योंकि उसके पास चावल रखने की जगह नहीं बची।

पहले की मिलिंग का चावल जगह की कमी के कारण सीडब्लूसी से लेने से इंकार कर दिया है। महासमुंद जिले के गोदामों की भी यही हालत है। राइस मिलर परेशान हैं, क्योंकि उनको 15 अप्रैल के पहले कस्टम ंिमलिंग का लक्ष्य पूरा करना है। छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल का कहना है कि मार्कफेड राइस मिलर को तब तक धान का अगला लाट नहीं देता, जब तक वे कस्टम मिलिंग के चावल की सप्लाई नहीं करते। श्री अग्रवाल का आरोप है कि अधिकारी और सरकार इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे।





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