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सीएम का आदेश काटा मंत्री ने

रायपुर. कृषि विभाग में कंप्यूटर खरीदी के जिस मामले की जांच मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने कराई और दोषी अफसरों पर कार्रवाई के आदेश दिए, कृषिमंत्री मेघाराम साहू ने उस मामले की फाइल ही यह लिखकर नस्ती करवा दी कि कार्रवाई की जरूरत नहीं है।

comकंप्यूटर खरीदी में तीन साल पहले हुई गड़बड़ी का मामला अचानक फिर गरमा गया है। इस मामले में कुछ अफसर दोषी पाए गए थे और मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए थे। कृषि मंत्री मेघाराम साहू की फाइल नस्ती करने की टीप ने राजनैतिक ही नहीं, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है।

जिस घोटाले में मुख्यमंत्री ने जांच कराई और आरोपियों पर कार्रवाई के आदेश दिए, उसे मंत्री ने फाइल कर दिया, इसकी चर्चा गर्म है। हालांकि कृषि मंत्री श्री साहू ने पूरे मामले पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने इसके लिए अफसरों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उन्हें धोखे में रखा गया। वे प्रकरण की फाइल मंगवाएंगे और जरूरी हुआ तो दोबारा जांच करवाएंगे।

इस गंभीर मामले की पड़ताल के दौरान दैनिक भास्कर को पता चला है कि कृषि संचालनालय से कंप्यूटर खरीदी के घोटाले से संबंधित फाइल से पृष्ठ क्रं. 1 से 12 तक की नस्ती गायब कर दी गई है। खबर है कि इस नस्ती में वित्तीय नियमों के घोर उल्लंघन के वे सबूत थे, जो दोषी अफसरों को कानूनी फंदे में फंसा सकते थे।

कैसे हुआ गोलमाल
केंद्र के मैक्रोमैनेजमेंट वर्कप्लान के तहत 2004-05 में राज्य में कृषि संचालनालय, जिलों और ब्लाकों के कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण के लिए 20 लाख रुपए मिले। अधिकारियों ने दिशा इंफोवे इंडिया प्रा. लि. रायपुर से 10 कांपेक के पीसी और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (एनसीसीएफ) से साफ्टवेयर, सीडी राइटर, लैपटाप, यूपीएस स्कैनर खरीदे। इसके लिए राज्य सरकार की नाइस और चिप्स से न तो संपर्क किया न सलाह ली गई। वित्त विभाग से भी अनुमति नहीं ली। तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त डा. पंकज द्विवेदी ने गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर विशेषज्ञों की जांच कमेटी बैठाई।

मुख्यमंत्री का अनुमोदन
जांच रिपोर्ट में खरीदी नियमों की अनदेखी और फर्जी बिलों के जरिए लाखों की गड़बड़ी का खुलासा हुआ। इसमें आधा दर्जन अधिकारियों को सीधे और तीन को अप्रत्यक्ष तौर पर दोषी पाया गया। श्री द्विवेदी ने जांच रिपोर्ट का परीक्षण करवाकर लंबी टीप के साथ इसे मुख्यसचिव आरपी बगई के जरिए कार्रवाई अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्री को भेजा। मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का 29 नवंबर 05 को अनुमोदन कर दिया। इस आधार पर दोषी अफसरों को चार्जशीट जारी की गई। इस बीच, आरके सिंह ने कंप्यूटर खरीदी का आदेश निरस्त कर दिया। तब तक कंपनी को करीब 6 लाख रुपए का भुगतान हो चुका था।

बिलों में हेराफेरी से फंसे
बताया गया कि खरीदी को सही ठहराने के लिए दोषी अफसरों ने एक बिल को 10-12 भागों में बांटकर नए बिल बनवाए गए। यह भी पकड़ में आ गया। यह वित्तीय संहिता और भंडारक्रय नियमों के खिलाफ है। आदेश के करीब ढाई साल बाद बिलों का निरस्त करना भी अनियमितता की श्रेणी में आता है।

इस तरह हुआ खेल
मामले की फाइल दोबारा कृषि मंत्री के पास पहुंची तो उन्होंने आश्चर्यजनक रूप से मामले को नस्तीबद्ध करने के आदेश 14 नवंबर 07 को दे दिए। इस बीच एपीसी श्री द्विवेदी का तबादला हो गया। उनके स्थान पर आए सरजियस मिंज ने मंत्री को पुन: फाइल भेजी और पुनर्विचार का आग्रह किया। श्री साहू ने इसे इस टीप के साथ लौटा दिया कि जरूरत नहीं है। फाइल 10 जनवरी 08 को बंद कर दी गई।

मुख्यमंत्री ने तलब किया
खबर है कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री डा. सिंह ने श्री साहू को तलब किया। मंत्रालय में दोनों की अकेले में चर्चा हुई। माना जा रहा है कि सीएम ने अपनी नाराजगी से श्री साहू को अवगत करा दिया है।

मंत्री ने कैसे बचाया?
कृषि मंत्री श्री साहू ने नस्तीबद्ध करने लिखा कि साफ्टवेयर खरीदी की कार्रवाई केंद्र एवं राज्य सरकार की योजना के तहत मंजूर थी। क्वालिटी समेत कई कारणों से खरीदी आदेश निरस्त किया गया। इससे शासन को क्षति नहीं हुई, इसलिए सुनवाई की आवश्यकता नहीं है।

सीएम को ही अधिकार
जीएडी अधिकारियों के मुताबिक कैबिनेट संवैधानिक संस्था है। सीएम उसके कैप्टन हैं। सीएम का कोई भी आदेश या फैसला संवैधानिक होता है। इसे कोई मंत्री नहीं बदल सकता। यदि सीएम ने प्रकरण में कार्रवाई का अनुमोदन किया था तो वे ही रोक लगा सकते हैं।

दोषी पाए गए अफसर

>> संचालक कृषि डा. एजेवी प्रसाद
>> आर के सिंह अपर संचालक
>> एके वर्मा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकार
>> आरके स्वर्णकार कृषि विकास अधिकारी
>> सीबी लोंढ़ेकर उपसंचालक
>> एनएन श्रीवास्तव को सहायक संचालक





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