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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिश्रामपुर. लगातार घाटे में चल रहे एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र ने काफी मशक्कत के बाद बीते वित्तीय वर्ष 2007-08 में 51 करोड़ का लाभ अर्जित किया है। वहीं मिनी रत्न की उपाधि से सम्मानित एसईसीएल कंपनी ने 2414 करोड़ का मुनाफा कमाया है। कोयला खान अधिकारियों एवं मेहनतकश कामगारों के अथक प्रयासों से बिश्रामपुर क्षेत्र बमुश्किल घाटे से उबर पाया है।
कई वर्षो से घाटे से जूझ रहे बिश्रामपुर क्षेत्र में सुरक्षात्मक उत्पादन के कारण बीते वित्तीय वर्ष खान दुर्घटना में किसी भी श्रमवीर की मौत नहीं हुई है। वर्ष 2006-07 की तुलना में बीते वित्तीय वर्ष 07-08 में क्षेत्र की भूमिगत खदानों में करीब 1.87 लाख टन कोयला उत्पादन में वृद्घि हुई है। वहीं पोखरिया खदानों में पिछले वर्ष की तुलना में 2.29 लाख टन कोयले का अधिक उत्पादन हुआ है।
बिश्रामपुर क्षेत्र का वर्ष 07-08 के लिए उत्पादन लक्ष्य 22.50 लाख टन था लेकिन नई परियोजना अमेरा के प्रारंभ न हो पाने की वजह से उत्पादन लक्ष्य घटकर 19.70 लाख टन रह गया। काफी मेहनत के बाद क्षेत्र ने 21.64 लाख टन अपने निर्धारित लक्ष्य से 1.94 लाख टन अधिक कोयला उत्पादन कर 51 करोड़ का मुनाफा क माया है। क्षेत्र की भूमिगत खदानों का उत्पादन लक्ष्य 12.70 लाख टन था लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद उत्पादन लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका। लक्ष्य से 455 टन पीछे रहना पड़ा। वहीं ओसीएम परियोजना ने अपने निर्धारित उत्पादन लक्ष्य 7.50 लाख टन से 1.45 लाख टन कोयले का अधिक उत्पादन किया।
उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में एसडीएल की उत्पादकता कंपनी के अन्य सभी क्षेत्रों से इस वर्ष भी अधिक रही। उत्पादन के दौरान बीते वित्तीय वर्ष खान दुर्घटना में मौतों का आंकड़ा शून्य रहा। गंभीर दुर्घटनाओं में भी कमी आई है। क्षेत्र से बीते वर्ष रिकार्ड 20.93 लाख टन कोयले का प्रेषण किया गया है जबकि पिछले वर्ष 18.21 लाख टन कोयले का प्रेषण किया गया था।
क्षेत्र ने ओबी उत्पादन भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक किया है। 55.00 लाख क्वि. मीटर विभागीय ओबी उत्पादन लक्ष्य के एवज में क्षेत्र ने 56.34 लाख क्वि. मीटर ओबी उत्पादन किया है। पिछले वर्ष की तुलना में बीते वित्तीय वर्ष 11 फिसदी ओबी उत्पादन अधिक हुआ है। वहीं परिवहन ठेकेदार से विवाद के कारण बीते वित्तीय वर्ष में कुम्दा रेलवे साइडिंग से रेलवे डेमरेज में बढ़ोत्तरी होने की खबर है।
मददगार रही शार्टवाल परियोजना
इस क्षेत्र को घाटे से उबारने प्रबंधन ने आधुनिक तकनीक से कोयला उत्पादन करने की रूपरेखा तैयार की। क्षेत्र की बलरामपुर परियोजना में 30 दिसंबर 07 को विश्व में पहली बार शार्टवाल पद्घति से 46 करोड़ की लागत से कोयला उत्पादन प्रारंभ किया गया। इस पद्घति से प्रतिदिन 5 सौ टन कोयला उत्पादन की उम्मीद थी जबकि इससे 12 सौ टन उत्पादन प्रतिदिन कर कीर्तिमान स्थापित किया गया है। क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक ए. के. सिंह के मुताबिक तीन माह में शार्टवाल पद्घति से 89.85 लाख टन कोयले का रिकार्ड उत्पादन किया गया है। वहीं बलरामपुर परियोजना में माह फरवरी में 08 में लांगवाल पद्घति से भी कोयला उत्पादन प्रारंभ कर साढ़े संतावन हजार टन कोयला उत्पादन किया गया।
नई परियोजनाओं में क्षेत्र का भविष्य
बिश्रामपुर क्षेत्र में खुलने वाली अमेरा ओसीएम परियोजना सहित केतकी, बिनकरा भूमिगत एवं आमगांव ओसीएम परियोजनाओं में क्षेत्र का भविष्य निहित है। सीजीएम ए. के. सिंह ने बताया कि नई अमेरा ओसीएम परियोजना में जल्द से जल्द कोयला उत्पादन प्रारंभ करने युद्घस्तर पर प्रयास किया जा रहा है। अमेरा परियोजना में प्रभावित 56 भू-धारकों को नौकरी दी जा चुकी है। 32 भू-धारकों को नौकरी देने की प्रक्रिया अंतिम चरणों पर है। इस परियोजना में 25 मिलियन टन कोयले का भंडार है। प्रतिवर्ष कोयला उत्पादन लक्ष्य एक मिलियन टन निर्धारित है। खदान की उम्र 25 वर्ष और लागत 46 करोड़ है।
नई केतकी भूमिगत परियोजना में 20-25 मिलियन टन कोयले का भंडार है। इसकी लागत 46 करोड़ होगी। बिनकरा भूमिगत परियोजना में 10.77 मिलियन टन कोयला भंडारित है। इसकी लागत करीब 39 करोड़ होगी। आमगांव खुली परियोजना में 25.47 मिलियन टन कोयले का भंडार है। इसकी लागत करीब 40 करोड़ प्रस्तावित है। सीजीएम श्री सिंह ने कहा कि उत्पादन के अलावा सामुदायिक विकास सहित औद्योगिक संबंध, खेलकूद, कल्याणकारी गतिविधियों में भी प्रबंधन पूरी तरह सजग रहा है। उन्होंने क्षेत्र क ो घाटे से उबारने में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष भूमिका निभाने वाले कामगारों, अफसरों एवं आमजनों को आभार व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।