उदयपुर. लेकसिटी में प्रेशर हॉर्न से बढ़ रहे ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती से पाबंदी लगाने के लिए परिवहन विभाग द्वारा विशेष अभियान शुक्रवार को प्रारंभ होगा। 16 अप्रैल तक चलने वाले पहले चरण में वाहन चालक को समझाया जाएगा। जिला परिवहन अधिकारी प्रभुलाल बामनिया ने बताया कि मुख्यालय से मिले निर्देशानुसार प्रेशर हार्न बजाने वाले परिवहन निरीक्षक अब वाहन चालकों से सख्ती से पेश आएंगे।
दुपहिया वाहनों में प्रेशर हॉर्न
बामनिया ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण करने की दिशा में यह कार्रवाई की गई है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रेशर हॉर्न का वाहनों में उपयोग प्रतिबंधित है जबकि वीडियो कोच बसों में इस प्रकार के हॉर्न उपयोग में लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शहर में कई दुपहिया वाहनों में भी प्रेशर हॉर्न लगे हैं। मनचले युवकों ने अपने वाहनों में ऐसे हॉर्न लगा रखे हैं जिससे राह में चलने वाले लोग काफी परेशान हैं।
वाहनों में इलेक्ट्रिक हॉर्न की अनुमति
परिवहन अधिकारी ने बताया कि वाहनों में केवल अधिकृत इलेक्ट्रिक हॉर्न लगाने की अनुमति है। बड़े वाहनों के साथ-साथ अब दुपहिया वाहनों में लगे प्रेशर हॉर्न वाले वाहन संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
क्या कहता है कानून
ध्वनि नियंत्रण के लिए देश में एवं राज्य में राजस्थान कोलाहल नियंत्रण एक्ट 1963 बना हुआ है। इस कानून के तहत ऐसी व्यवस्था है कि चिकित्सालयों, टेलीफोन एक्सचेंज, न्यायालय, शिक्षण संस्थाओं, सरकारी कार्यालयों के परिसर से 150 मीटर के अंदर ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग नहीं होगा। भारतीय मोटर कानून 1939 में शोर-नियंत्रण के प्रावधान हैं। इस अधिनियम की अवलेहना करने वालों को प्रथम बार में 250 रुपए, दूसरी बार में 250 रुपए तथा एक माह की कैद की सजा का प्रावधान है।
परिवहन-पुलिस संयुक्त कार्रवाई अब 15 से
पुलिस एवं परिवहन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई अब 15 से 22 अप्रैल तक चलेगी। राज्य सरकार के निर्देशानुसार चलने वाले इस अभियान में ऐसे वाहन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई होगी जो परिवहन नियमों को ताक में रखकर वाहनों का संचालन कर रहे हैं।
परिवहन अधिकारी बामनिया ने बताया कि प्रदेशस्तर पर चलने वाला यह अभियान पहले 11 अप्रैल से शुरू होना था, लेकिन अब यह अभियान पंद्रह अप्रैल से प्रारंभ होगा। विभाग की सात निरीक्षण दलों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं।