बीकानेर.
डूंगर कॉलेज और एमएस कॉलेज के सात व्याख्याताओं द्वारा एक ही कार्य के लिए दोहरा भुगतान उठाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
मामले का पता चलने के बाद अब बीकानेर विश्वविद्यालय ने दोनों कॉलेजों के प्राचार्यो को पत्र लिखकर इन व्याख्याताओं से रिकवरी करने का निर्देश दिया है। विवि ने इन व्याख्याताओं को परीक्षा कार्य के पेटे भुगतान के लिए कॉलेजों को राशि भेज दी थी। व्याख्याताओं ने कॉलेज और विवि दोनों ही जगह बिल पेश कर भुगतान उठा लिया और विवि में इस कार्य की पूरी मोनीटरिंग नहीं होने के कारण इसका पता नहीं चला।
वित्तीय वर्ष के लेखों का जब मिलान किया गया तो मामला सामने आया। इसके बाद तीन अप्रैल को विवि ने डूंगर कॉलेज और चार अप्रैल को एमएस कॉलेज प्राचार्य (कोर्डिनेटर) को पत्र लिख कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने और रिकवरी करने का निर्देश दिया। ऐसा ही एक पत्र विवि के कार्यवाहक परीक्षा नियंत्रक को भी भेजा गया है।
जानकारी के अनुसार विवि ने इन व्याख्याताओं को वर्ष 2007 की परीक्षा की कॉपियां जांचने का काम सौंपा था जिसके पेटे भुगतान किया गया। कार्य के हिसाब से इन व्याख्याताओं को करीब 9900 रुपए का भुगतान करना था मगर इनको 19884 रुपए का भुगतान कर दिया गया। भुगतान में विसंगति का मुख्य कारण व्याख्याताओं द्वारा कॉलेज प्राचार्य और विवि के कार्यवाहक परीक्षा नियंत्रक उमेश चतुर्वेदी दोनों को बिल पेश कर दिया जाना है। इस कार्य में मुख्य रूप से विवि के परीक्षा सेल की लापरवाही भी नजर आती है।
इस तरह चला खेल >>
इस प्रकरण में शामिल व्याख्याताओं को दो अलग-अलग चेक में एक ही कार्य का दो बार भुगतान किया गया है। इन व्याख्याताओं में डॉ. बबीता जैन को दो बार 2679-2679 रुपए का भुगतान किया गया है। इसी प्रकार डॉ. मंजूला बारेठ को 1509-1509, डॉ. चंद्रप्रकाश खत्री को 2523-2523, डॉ. मधु कपूर को 2839-2839, देवेश खंडेलवाल को 517-489, अर्चना गौड़ को 3036-2801 रुपए का भुगतान किया गया। अभिलाषा आल्हा को तीन बार भुगतान करना था मगर हुआ छह बार। अभिलाषा को 7044 रुपए की जगह 14088 रुपए का भुगतान किया गया।
रिकार्ड मेंटेन में लापरवाही
परीक्षा कार्य से जुड़े प्रत्येक व्याख्याता का विवि में रिकार्ड मेंटेन होता है। इनमें रिकार्ड में साल में औसनत तीन या चार बार ही इंद्राज होता है, इसके बाद भी डबल भुगतान होना,व्यवस्था पर सवालिया निशान लगता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विवि में न तो कॉपी डिस्पेच करने का रिकार्ड रखा जाता है और न ही बिल प्रमाणीकरण करते समय सावधानी बरती जाती है।
रिकवरी के लिए प्राचार्यो को निर्देश दे दिया है। अगर रिकवरी नहीं होती है तो विवि इन व्याख्याताओं के खिलाफ कार्रवाई करेगा। इन व्याख्याताओं को दो जगह बिल नहीं भेजने थे क्योंकि बिल प्रमाणीकरण के लिए कोर्डिनेटर को अधिकृत कर रखा है। भविष्य में ऐसी गलती नहीं हो,इसकी पुख्ता व्यवस्था की जाएगी।
-उमेश चतुर्वेदी
कार्यवाहक परीक्षा नियंत्रक बीकानेर विवि
विवि की ओर से ऐसा कोई पत्र आया है, फिलहाल मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मामले का पता करवाऊंगा। डबल भुगतान कैसे हुआ है, यह सोचनीय बिंदु है।
-मदन मोहन नामा प्राचार्य, एमएस कॉलेज
अभी में अवकाश पर हूं। आने के बाद इस मामले की तहकीकात करवाई जाएगी। अगर ऐसा कोई भुगतान हुआ है और इसमें किसकी लापरवाही है, इसका पता तो चलना ही चाहिए।
-रामगोपाल भूतड़ा प्राचार्य, डूंगर कॉलेज