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‘बीपीएल की थ्योरी सही नहीं’

कोटा. राजस्थान आर्थिक पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष जस्टिस शशिकांत शर्मा का मानना है कि आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए समाज और शासन को सकारात्मक नजरिया रखना होगा। शर्मा ने कहा कि कमजोर तबके की मदद के लिए शुरू की गई बीपीएल की थ्यौरी सही नहीं है। इसमें अनियमितताएं ज्यादा है।

आयोग की जनसुनवाई के सिलसिले में कोटा आए शर्मा ने खबरनवीसों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि आयोग का गठन हुए 6 माह हो चुके हैं और अब तक सीकर, टोंक, पुष्कर तथा बूंदी का दौरा किया जा चुका है। राज्य के समस्त जिलों में जाकर रिपोर्ट तैयार करनी है। इसके लिए तीन वर्ष का समय दिया गया है लेकिन, रिपोर्ट उससे पहले ही दे दी जाएगी।

इन पर रहेगा ध्यान

>> कितनी आमदनी वाले को पिछड़ा माना जाए
>> उसकी आवश्यकताएं क्या-क्या हैं
>> कमजोर तबके को क्या दिया जाए जिससे वह मजबूत हो
>> 50 हजार, 1 लाख या 1.5 लाख रुपए सालाना आय वालों में से किसको कमजोर माना जाए

आज मुलाकात
शर्मा तथा सदस्य सचिव आशुतोष गुप्त शुक्रवार को कलेक्ट्रेट के कान्फ्रेंस हॉल में दोपहर 12 बजे अनारक्षित समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेगा।

राजस्थान अगुवा
राजस्थान पहला ऐसा राज्य है, जहां आर्थिक पिछड़ा आयोग गठित किया गया है। अनारक्षित वर्ग के बारे में आयोग जानकारी प्राप्त कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। जिलों में जन सुनवाई का दौर चल रहा है।





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