HomeNewsRajasthanKota Kota

नहीं छूटेगा आयकर से पीछा

कोटा. केन्द्र सरकार ने भले ही आयकर की सीमा बढ़ा दी हो, लेकिन लोगों का आयकर विभाग से पीछा नहीं छूटेगा। सीमा बढ़ने से राहत तो मिली है, परन्तु आयकर के दायित्व से मुक्त नहीं होगा। रिटर्न भी देनी होगी।

केन्द्रीय बजट में आयकर की सीमा एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए करने के बाद यह माना जा रहा है कि वह अपने पास 50 हजार रुपए और बचा लेगा। यानि वह अब डेढ़ लाख रुपए से अधिक आय होने पर ही कर देगा। यह भी सच है कि फिर भी वह आयकर विभाग से नहीं बच सकेगा।

विभाग के पास अब बैंक और अन्य सूत्रों से इस प्रकार की जानकारी समय-समय पर जुटाई जाती है। जिससे यह पता लग जाता है कि व्यक्ति ने किस-किस में निवेश किया है। इसके बाद शुरू होती है आय के स्त्रोत की तलाश। कर विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने एक हाथ से दिया है तो दूसरे हाथ से वसूलने का रास्ता निकाल लिया है। सरकार को इसकी जानकारी पहले ही थी, कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू के बाद कर्मचारियों के वेतन बढ़ जाएंगे। इसके बाद स्थिति वहीं की वहीं।

आयकर सीमा बढ़ने से करदाताओं को राहत मिली है। इससे करदाता कम नहीं होंगे। करदाता पहले एक लाख बचाता था, अब डेढ़ लाख बचाने की कोशिश करेगा। परन्तु कर का दायित्व तो रहेगा।’
—बी. वी. माहेश्वरी, अध्यक्ष, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अंकाउंटेट

आयकर सीमा बढ़ाने से असेसी कम नहीं होंगे। छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद असेसी बढ़ जाएंगे। यह मानना बेमानी होगा की सीमा बढ़ने से असेसी घटेंगे।’
—मुकेश गुप्ता, कर सलाहकार

रिटर्न बढ़ रही हैं
पर्सनल लोन से साल दर साल व्यक्तिगत रिटर्न की तादाद बढ़ रही है, परन्तु कर संग्रह नहीं होता। सरकार के पास निजी टैक्स कम और कापरेरेट टैक्स अधिक आता है।

कोटा चार्ज में डेढ़ लाख असेसी
आयकर आयुक्त एम. के. इदनानी ने बताया कि अभी कोटा प्रभार (चार्ज) में डेढ़ लाख असेसी हैं। इस बार सीमा बढ़ाने का असर कर निर्धारण वर्ष 2008-09 में दिखेगा।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: