अजमेर.
संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार कमेटी के सदस्य और पाकिस्तान के पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार अहमद बर्नी ने कहा कि अगर सरबजीत सिंह की रिहाई से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में मजबूती आती है, तो सरबजीत को छोड़ देना चाहिए। बर्नी गुरुवार को दरगाह जियारत के बाद खबरनवीसों से बातचीत कर रहे थे।
बर्नी ने कहा कि दोनों ही मुल्कों को जेलों में सजा काट रहे बेगुनाह बंदियों की रिहाई के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। भारत ने पहल करते हुए यहां की जेलों में बंद 150 कैदियों की सूची सौंपी है। उधर, पाकिस्तान में भी 200 भारतीय जेलों में बंद हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरबजीत सिंह की रिहाई से दोनों देशों के फासले कम हो सकते हैं तो उस पर जिस बम विस्फोट का आरोप है उसमें मारे गए 14 लोगों की कुर्बानी को भी भुलाया जा सकता है। पाक सुप्रीम कोर्ट ने सरबजीत को सजा-ए-मौत का हुक्म दे दिया है और राष्ट्रपति ने रहम की अपील रद्द कर दी है लेकिन मानवता के नाते उसकी रिहाई के लिए पाक सरकार को वापस गौर करने के लिए खत लिखा है।
150 पाक कैदियों की सूची सौंपी
बर्नी ने कहा कि दोनों देशों की जेलों में बंद अधिकतर कैदी बेगुनाह हैं। भारत के गृहमंत्री और विदेश मंत्री ने इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाते हुए यहां की जेलों में बंद 150 कैदियों की सूची सौंपी है। स्वदेश पहुंच कर वे इन कैदियों के रिश्तेदारों और अजीजों का पता लगाएंगे। उन्होंने कहा कि पाक जेलों में अकेले सरबजीत सिंह ही बंद नहीं हैं। वहां भी लगभग दो सौ भारतीय विभिन्न जेलों में सजा काट रहे हैं। इन कैदियों के सूची भी भारत सरकार को भेजी जाएगी।
सरबजीत के परिवार से मिले
अंसार बर्नी ने कहा कि उन्होंने पंजाब में सरबजीत सिंह की पत्नी और उसकी बच्चियों से मुलाकात की और उनका पक्ष जाना।
दाऊद का पता नहीं
एक सवाल के जवाब में बर्नी ने कहा कि दाऊद इब्राहीम कहां है, इसका उन्हें इल्म नहीं।
राजनीतिज्ञों का इल्जाम
उन्होंने कहा कि कश्मीर या कराची में होने वाले बम विस्फोट या किसी अन्य दहशतगर्द घटना में दोनों देशों के राजनीतिज्ञ नाकाम होने पर एक दूसरे की इंटेलीजेंस पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि जब दोनों देश सुरक्षा पर करोड़ो-अरबों रुपए खर्च कर रहे हैं, फिर यह कैसे संभव है कि पाकिस्तान में रॉ ने और भारत में आईएसआई ने दहशतगर्दी वारदातें अंजाम दी हैं।
..तो दहशतगर्दी खत्म होगी
बर्नी ने कहा कि जब समाज में इंसाफ कायम होगा तो दहशतगर्दी अपने आप खत्म हो जाएगी। दोनों देशों की सरकारों को बारूद पर राशि खर्च करने के बजाए गरीबी दूर करने पर बजट खर्च करना चाहिए।
दरगाह जियारत की
बर्नी ने बेगम शाहीन बर्नी और साले तालिब अहमद के साथ गुरुवार की रात दरगाह जियारत की। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गीलानी और स्वयं की ओर से ख्वाजा साहब की मजार पर मखमल की चादर और अकीदत के फूल पेश कर दोनों देशों के मजबूत रिश्तों की मन्नत मांगी। उन्हें खादिम सैयद यामीन हाशमी ने जियारत कराई, दस्तारबंदी की और तबरुक भेंट किया।
पहली बार जियारत
बर्नी ने कहा कि बचपन से दरगाह जियारत की तमन्ना था, लेकिन पहली बार मौका मिला।
सरबजीत की रिहाई के लिए ज्ञापन
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व शहर अध्यक्ष आरिफ हुसैन की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने बर्नी को ज्ञापन देकर सरबजीत की रिहाई की मांग की। हुसैन ने कहा कि अजमेर के लोग भी उसकी रिहाई चाहते हैं।