लाइसेंस के लिए पहले डीसी आफिस में अर्जी देनी पड़ती है। वे पिछला रिकार्ड देखते हैं कि कहीं लाइसेंस लेने वाल पर कोई केस तो नहीं चल रहा। इसके बाद जब इन्क्वायरी हो जाती है तो लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसे एप्लाई करने से पहले होम गार्ड से 15 दिन की ट्रेनिंग लेनी पड़ती है। पानीपत में ईदगाह रोड पर यह ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें कैसे हथियार खरीदने हैं। उसकी कैपेसिटी क्या है। साफ कैसे करते हैं। आइलिंग कैसे करनी है सब सिखाया जाता है। इसके बाद लिखित में टेस्ट होता है और 10 गोलियां दी जाती है, जिनसे निशाना लगाना होता है। पास होने के बाद लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
ऐसी होती है प्रक्रिया
15 दिन की होम गार्ड से ट्रेनिंग लेने के बाद कोर्ट से फाइल तैयार करवानी होती है। इसके बाद डीसी आफिस से इस फाइल को मार्क करवाकर एसपी आफिस भेजा जाता है। वहां से यह फाइल थाने जाती है फिर डिप्टी के बाद एसएचओ के पास, फिर चौकी इंचार्ज वैरीफाई करता है। इसके बाद यह फाइल इसी प्रकार वापस डीसी आफिस तक पहुंचती है। फिर यह देखा जाता है कि लाइसेंस लेने वाला इस काबिल भी है या नहीं। उसके बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है फिर एक टाइम लिमिट होती है कि आप 6 महीने या एक साल के अंदर इसे खरीद लें। पहले लाइसेंस हरियाणा के लिए बनता है फिर आल इंडिया का बनता है।
कब वापस लिया जाता है
यदि आपने रिवालवर या पिस्टल ले लिया है तो इलेक्शन के दिनों में यह आपसे वापस ले लिया जाता है। यदि आप हरियाणा का बार्डर क्रास कर रहे हैं तो वहां पास के थाने व चौकी में जमा करवाना पड़ता है। आप इसे मंदिर के अंदर भी नहीं ले जा सकते।
एहतियात बहुत जरूरी
बच्चों वाले घर में तो इसका बहुत ध्यान रखना पड़ता है। कई बार पिस्टल साफ करते-करते गोली चलने की वारदातें सुनने को मिलती हैं। कई बार बच्चे खिलौना समझकर इससे खेलने लगते हैं, जिससे दुर्घटना होने का डर रहता है। पिस्टल पर नम्बर होता है। साल में गोलियों का एक कोटा मिलता है। वह नम्बर रजिस्टर में चढ़ जाता है। इन रजिस्टर पर चढ़ी गोलियों से इसके लिए बाकायदा स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है।
लंबी है प्रक्रिया
लाइसेंस लेने की प्रक्रिया लंबी होने के कारण अभी महिलाओं के पास लाइसेंस कम ही हैं। कैथल में अभी तीन महिलाओं के पास ही हथियार रखने का लाइसेंस हैं। यमुनानगर में दो ही महिलाओं को लाइसेंस जारी हुए हैं। इसी प्रकार पानीपत में सात महिलाओं के पास हथियार रखने का लाइसेंस हैं। अम्बाला में 12 महिलाओं के पास लाइसेंस हैं।
एकल परिवार में महफूज नहीं
लाइसेंस के लिए एप्लाई कर चुकी आशु नंदा का कहना है कि पहले ज्वाइंट फैमिली होती थी। इसलिए डर कुछ कम था, लेकिन आजकल एकल परिवारों के बढ़ने के कारण महिलाएं खुद को असुरक्षित समझती हैं। आजकल महिलाएं घर से बाहर भी रहने लगी हैं। इस कारण भी उन्हें आत्मरक्षा के लिए हथियार रखना जरूरी है। इस बारे में आशु नंदा का कहना है कि पुरुष हर वक्त तो साथ नहीं रह सकते। इस कारण भी महिलाओं में हथियार रखना आज की जरूरत बनती जा रही है। वहीं अम्बाला की रेखा परूथी रिवाल्वर शौक के कारण अपने पास रखती हैं।