जालंधर स्कूलों का नया सैशन शुरू होते ही बच्चों के साथ-साथ पेरैंट्स की जद्दोजहद भी शुरू हो चुकी हैं। स्कूल बच्चों ने जाना है, लेकिन टैंशन और जिम्मेदारी पेरैंट्स की बढ़ चुकी है, क्योंकि उन्हें बच्चों की स्कूल की जरूरतों को पूरा करना है। इसमें ज्यादा परेशानी उठा रही हैं माताएं। भास्कर ने बिजी शैड्यूल वाली ऐसी ही कुछ मदर्स से बात की, जो हैं बच्चे के स्कूल जाने से खासी बिजी हो गई है।
स्कूलों का नया सैशन शुरू होते ही बच्चों के साथ-साथ पेरैंट्स की जद्दोजहद भी शुरू हो चुकी हैं। स्कूल बच्चों ने जाना है, लेकिन टैंशन और जिम्मेदारी पेरैंट्स की बढ़ चुकी है, क्योंकि उन्हें बच्चों की स्कूल की जरूरतों को पूरा करना है। इसमें ज्यादा परेशानी उठा रही हैं माताएं। भास्कर ने बिजी शैड्यूल वाली ऐसी ही कुछ मदर्स से बात की, जो हैं बच्चे के स्कूल जाने से खासी बिजी हो गई है।
मदर्स को इन दिनों परेशानी बच्चों के स्कूल जाने की तैयारी करवाने की ही नहीं, बल्कि उनकी स्कूल से जुड़ी समस्याओं की भी है। इनका मानना है कि स्कूल चाहे बच्चों ने जाना है, मगर टैंशन पेरैंट्स को है।
डिमांड ही डिमांड है
मेरी बेटी थर्ड में हुई है। नई क्लास में एन्ट्री लेने के लिए वो बेहद उत्साहित है। क्लास चाहे छोटी है, लेकिन डिमांड मेरे बड़े बेटे से भी ज्यादा है। रोज कुछ नया लेने के लिए तैयार हो जाती है। कहीं कपड़ों की तो कभी स्कूल किट की डिमांड रहती है। बस सारा दिन इसी की तैयारी में निकल जाता है, एक हफ्ते से काम पर ध्यान नहीं दे पाई हूं।
- रीना सेठ अपनी बेटी गोपिका सेठ के साथ।
हर बार नई चीजों की डिमांड
मेरी बेटी यूकेजी में पढ़ती है और अपनी नई बुक्स व बैग को लेकर इतनी उत्साहित है कि किसी को हाथ भी नहीं लगाने देती। रोज बैग खोल कर बैठ जाती है। कभी कहती है कि पैन्सिल शार्प करो तो कभी बैग नया लाकर दो। उसकी डिमांड खत्म ही नहीं होती और हमारी भी कोशिश रहती है कि इसकी हर डिमांड को पूरा किया जाए। वैसे भी देखा जाए तो ये तो स्कूल को एन्जॉय करते हैं असल मेहनत तो हमारी है।
- मीनू गुप्ता, बेटी सानिया के साथ
नई क्लास नया उत्साह मेरा बेटा सैकेंड क्लास में पढ़ता है और एग्जॉम के बाद मैं उसे घर में ही क्लासेस लगवाती हूं। उस पर खास ध्यान रखती हूं कि ताकि नई क्लास में नई टीचर पर मेरे बेटे का इम्प्रैशन अच्छा पड़े। रोजाना इसकी नई बात होती है। कई बार तो नई क्लास को लेकर ऐसे सवाल पूछ लेता है कि जवाब देना ही मुश्किल हो जाता है। अब तो नई क्लास में जाने का इतना क्रेज है इसमें कि दिन में बार-बार सवाल खड़े करता है। कभी-कभी तो तंग आ जाती हूं।
- आंचल, बेटे संचित के साथ