इंदौर. शहर में भी आए दिन छोटी-बड़ी वारदातें हो रही हैं। फिर भी यूनियन बैंक ने बगैर सुरक्षा गार्ड के इतनी बड़ी राशि रिक्शे में भेजी। कर्मचारियों ने बताया ऐसा 14 साल से चल रहा है। वारदात के तरीके को देखते हुए पुलिस को किसी परिचित का हाथ होने का शक है। कुछ दिन पहले राजकुमार ब्रिज और व्हाइट चर्च चौराहे पर बैंक से रुपया लेकर निकले लोगों को भी लगभग ऐसे ही लूटा गया।
यूनियन बैंक के मैनेजर नरेंद्रमोहन पंत ने बताया बैंक की मुख्य शाखा और सिंधी कॉलोनी चेस्ट के बीच करीब 3 किलोमीटर दूरी है। 14 साल से हर शुक्रवार कर्मचारी बैंक के बाहर खड़ी 5-6 रिक्शा में किसी एक से रुपए ले जाते थे। आज भी उन्होंने ऐसा ही किया। साथ में कहा रिक्शा चालक रमेश विश्वसनीय है और पहले भी दो बार रुपए ले जा चुका है। शहर में बढ़ती वारदातों का हवाला देकर श्री पंत ने मुख्य शाखा से सुरक्षा गार्ड की मांग की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
सुनियोजित षडयंत्र के साथ की वारदात
वारदात के तरीके को देख पुलिस को शक है बदमाशों ने सुनियोजित षडयंत्र रचा। उन्हें मालूम था शुक्रवार को भारी रकम भेजी जाती है। वे संभवत: बैंक से ही पीछा करने लगे थे। जैसे ही भीड़भाड़ से मुक्त चौड़ी सड़क मिली वारदात कर दी।
रिक्शा चालक या बैंक वालों की मिलीभगत
जिस तरह बैंककर्मी हर बार ब्रांच के बाहर से ही रिक्शा रोककर कैश ले जाते थे उससे स्पष्ट है कि बदमाशों को जानकारी किसी कर्मचारी या रिक्शा चालक ने ही दी होगी। ऐसी ही दर्जनों वारदातें शुभलक्ष्मी बैंक के भृत्य अजय जैन ने 2000 से 2007 के बीच की थी, जिसे कुछ महीने पहले ही पकड़ा गया।
गोली की पुष्टि पीएम से होगी
हत्या व लूट के बाद एसपी अंशुमान यादव, एडीशनल एसपी मनोजसिंह, सीएसपी संजय सिंह सहित कई अधिकारी पहुंचे और बदमाशों को पकड़ने के लिए फोर्स को सचेत किया। आसपास के लोगों से बात की, लेकिन कोई खास जानकारी नहीं मिली। वारदात के वक्त मौूजद रेखा ने बताया बदमाशों ने श्री गुप्ता को चाकू मारे जबकि अधिकारियों के मुताबिक उन्हें गोली भी लगी है। टीआई दौलतसिंह ने बताया इसका खुलासा पोस्टमॉर्टम के बाद ही होगा।
पुलिस ने चलाया था जागरूकता अभियान
12 मार्च को क्राइम ब्रांच ने स्टेट बैंक ऑफ इंदौर राजबाड़ा, बैंक ऑफ बड़ौदा जवाहर मार्ग, बैंक ऑफ इंडिया जीपीओ, एचडीएफसी बैंक ढक्कनवाला कुआं, यूटीआई बैंक तुकोगंज और आईसीआईसीआई बैंक एबी रोड पर आकस्मिक चेकिंग की थी। तब लूट की वारदातों को रोकने के लिए बैंकों को विभिन्न प्रकार के सुरक्षा इंतजाम तथा गार्डो की तैनाती के निर्देश दिए थे। इसकी जानकारी अन्य बैंकों में भी भेजी गई थी। हालांकि उन पर अमल नहीं किया गया।