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देखें कौन किसका साथ देता है!

भोपालदेश के आईपीएस अफसर इन दिनों छठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस लड़ाई में उन्होंने राज्य पुलिस सेवा के अफसरों का भी सहयोग मांगा है। तर्क दिया है कि एक न एक दिन तो तुम्हें भी आईपीएस कैडर मिलेगा। कभी दोयम दर्र्जे के समझे जाने वाले एसपीएस अफसर पसोपेश में हैं। उनका अपना तर्क है।

मांग थी कि कैडर रिव्यू की मांग में आईपीएस उनका साथ दें। इससे दोनों को फायदा होता। आईएएस के कुछ पद आईपीएस को मिलते, एसपीएस भी एसआरपी से लेकर छोटे जिलों में एसपी बनते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब बारी एसपीएस अफसरों की है, देखना है वे कितनी मदद करते हैं।

सब शांत हैं

राजधानी में कुछ तुर्रम समझे जाने वाले इंस्पेक्टर दो दिन से शांत हैं। इसके पीछे बड़े अफसरों का वह संकेत है, जिसका परिणाम भी आ चुका है। शहर के बड़े थानों में शामिल हनुमानगंज की कमान एक थानेदार को दे दी गई है। टीआई लाइन में हैं। वैसे ही जिले में इंस्पेक्टर्स की कमी है। इसका फायदा उठाकर भरी मीटिंग में थाने से हटाने की चुनौती देने वाले इंस्पेक्टर अब चुप्पी साधे हैं।

परिवहन की तरह कीमती हैं हाई-वे के थाने

अधिकतर पुलिसकर्मियों की रुचि परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर जाने में रहती है, लेकिन कुछ की ही यह इच्छा पूरी हो पाती है। इसका तोड़ कुछेक ने निकाल लिया है। वे वैसा ही मजा राजधानी में कर रहे हैं। शहर के बाहरी थाने इसकी मिसाल हैं। सिपाही से लेकर थानेदार तक के कुछ नाम चुनिंदा हैं, जो इसी तरह के थानों में पोस्टिंग पाते हैं। अब इनकी सूची बनाई जा रही है। मई तक इन सबको बाहर से बीच शहर या लाइन में लाने की तैयारी है।

कौन कहां जाएगा राजधानी के दो एएसपी ट्रांसफर की कतार में हैं। दोनों को यहां साढ़े तीन साल से अधिक का समय हो गया है। उनके तबादले की अटकलों में बड़े जिलों के नाम है। पिछले महीनों में भोपाल से जिसका भी ट्रांसफर हुआ वह इंदौर गया है। अब देखना है कि इन दोनों में से इंदौर की बाजी किसके हाथ लगती है।





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