इंदौर. मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में सोमवार को शादी रचाने वाले छह सौ से ज्यादा जोड़ों के दहेज के लिए पलंग व अलमारी जुटाना समस्या बन गई है। इनकी सप्लाय का जिम्मा जिस ठेकेदार को दिया है वह दिन-रात काम के बाद भी शादी की तारीख तक ऑर्डर पूरा करने की स्थिति में नहीं है। प्रशासन ने बाजार से खरीदने पर भी विचार किया लेकिन चद्दर के भाव बढ़ने से बजट बिगड़ रहा है।
विजयनगर में होने वाले शादी समारोह की तैयारी में जुटे युवा भारतीय संगठन व प्रशासन दहेज सामग्री को लेकर चिंतित हैं। दो दिन ही बचे हैं और तीन सौ से ज्यादा पलंग व इतनी ही अलमारियां आना बाकी है। ठेकेदार त्रिलोकचंद जैन के मुताबिक दिन-रात सौ से ज्यादा कारीगर काम कर रहे हैं।
15 दिन पहले ही ठेका दिया है इसलिए समय तो लगेगा। आयोजन समिति उपाध्यक्ष हीरालाल पाटीदार ने बताया पलंग व अलमारी छोड़ बाकी दहेज सामग्री आ गई है। सामग्री समय पर नहीं आई तो बाहर जाने वाली बरात को दहेज पहले देंगे और शहर में बाद में भेजेंगे। सीईओ, जिला पंचायत महेशचंद्र चौधरी ने बताया बैठक में तय करेंगे प्रबंध कैसे करें।
क्रिश्चियन जोड़ा भी लगाएगा फेरे :
प्रदेश में पहली बार 600 से ज्यादा जोड़ों की शादी एक ही मंडप में होने जा रही है। इसमें क्रिश्चियन समाज का एक जोड़ा भी हिंदू रीति-रिवाज से फेरे लेगा। मुस्लिम समाज के सात जोड़े भी शामिल हुए थे लेकिन वे रविवार को शादी करना चाह रहे थे। जिला प्रशासन ने उन्हें खजराना के एक सामूहिक विवाह समारोह में शामिल होने की स्वीकृति दे दी। समारोह में चार जोड़े अंतरजातीय हैं। दुल्हनें तो इंदौर जिले की ही हैं लेकिन दूल्हे गुजरात, राजस्थान व प्रदेश के अन्य जिलों से आ रहे हैं।
महंगाई की मार :
जिला प्रशासन ऐन समय पर बाजार से खरीदी की कोशिश में है लेकिन चद्दर के भाव 15 दिन में 15-20 रुपए किलो तक बढ़े हैं। ठेकेदार जिस कीमत पर सामग्री देगा, बाजार में मिलना मुश्किल है।
सरकारी दहेज :
पलंग, अलमारी, दो साड़ी, सफारी सूट, 38 बर्तन का सेट, साफा, मंगलसूत्र, पायजब, तीन बिछिया, चांदी की बिजासन, गादी, बिस्तर, तकिये व कंबल जिसकी कीमत लगभग छह हजार रुपए है।