इंदौर.
पलसीकर कॉलोनी मेनरोड पर माणिकबाग ओवरब्रिज के पास शुक्रवार शाम 4.30 बजे दो बाइक पर सवार छह नकाबपोशों ने रिक्शा से कैश लेकर जा रहे यूनियन बैंक, शिव विलास पैलेस राजवाड़ा के हेड कैशियर बीएम गुप्ता की हत्या कर 19.50 लाख रुपए से भरी पेटी लूट ली। उनके साथ जा रहे दो अन्य कर्मचारियों पर भी कट्टे व चाकू से वार किए।
श्री गुप्ता, कर्मचारी विकास शिंदे और रेखा दुबे के साथ ऑटो रिक्शा से बैंक की सिंधी कॉलोनी स्थित करेंसी चेस्ट शाखा में रुपए जमा करने जा रहे थे। रेखा के मुताबिक रिक्शा ब्रिज के करीब पहुंचा ही था कि हमने देखा दो बाइक पर छह नकाबपोश पीछा कर रहे हैं। इससे घबराए श्री गुप्ता ने रिक्शा चालक रमेश से गति बढ़ाने को कहा। उसने गति बढ़ाई भी लेकिन नकाबपोशों ने ओवरटेक कर रिक्शा रोका और सबसे पहले चालक को खींचकर उतारा व पीटने लगे। यह देख हम तीनों बैंककर्मियों ने चिल्लाना शुरू किया तो तीन नकाबपोश हम पर भी टूट पड़े। इस बीच तीन अन्य नकाबपोशों ने रुपयों से भरी पेटी उठाने की कोशिश की।
श्री गुप्ता ने विरोध किया तो एक नकाबपोश ने कट्टे से गोली चला दी और दूसरा चाकुओं से वार करने लगा। यह देख मैं घबराई और बचाने के लिए आवाज दी तो नकाबपोशों ने मुझे भी बाल पकड़कर पटक दिया। विकास ने विरोध किया तो उसे भी चाकू मारे, बेरहमी से पीटा और रुपए भरी पेटी लेकर ब्रिज की तरफ भाग निकले।
नकाबपोशों के भागते ही जमा हो गई भीड़
नकाबपोशों के भागने के बाद गोली की आवाज और चीख सुनकर आसपास के दुकानदार, मल्टी वाले व राहगीर जुटे। वहां श्री गुप्ता व विकास लहूलुहान पड़े थे। घबराई रेखा ने ब्रांच मैनेजर नरेंद्रमोहन पंत को मोबाइल पर सूचना दी। इस बीच लोगों से मिली सूचना पर पुलिस अधिकारी भी पहुंच गए। श्री गुप्ता को आनंद हॉस्पिटल ले गए जहां मृत घोषित कर दिया गया। विकास को चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती किया गया।
हीरो होंडा पैशन पर आए, एक पर नंबर नहीं था- रेखा व अन्य लोगों के मुताबिक मुंह पर रुमाल बांधे सभी छह लुटेरे हीरो होंडा पैशन पर थे जिसमें एक सिल्वर कलर की थी। लोगों ने एक बाइक के आखरी दो अंक 74 देखे। दूसरी पर नंबर नहीं था।
गृह मंत्री और डीजीपी के एक से सुर
कलेक्टोरेट से मात्र 200 मीटर और जूनी इंदौर थाने से महज आधा किमी दूर हुई वारदात ने बैंक प्रबंधन के साथ ही एक बार फिर पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
यह न कहें कि पुलिस का खौफ खत्म हो गया
घटना बहुत गंभीर है यह मैं भी मानता हूं पर शहर में पुलिस का खौफ खत्म नहीं हुआ है। यदि शहर में अपराध हुए हैं तो अपराधी पकड़े भी गए हैं।
-हिम्मत कोठारी, गृह मंत्री
यह हम भी मानते हैं कि अपराध बहुत गंभीर है और दुख:द भी क्योंकि इसमें एक आदमी की जान गई है। अपराध घटित होते हैं पर इसके पीछे यह कहना कि अपराधियों के हौसलें बुलंद हैं, ठीक नहीं है। घटना के आरोपी जल्दी ही पकड़े जाएंगे। एक बड़े अपराध के बाद वारदात ट्रेस करने के लिए जो किया जाता है वह हमने कर दिए है। कुछ क्लू हमें लगे हैं जिनसे जल्दी ही अपराधियों तक पहुंचा जाएगा।
-आनंदराव पंवार, डीजीपी
उलझे सवालों के करारे जवाब
घटनाक्रम से स्पष्ट है कि नजदीकी व्यक्ति लिप्त है। मुख्य प्रत्यक्षदर्शी कर्मचारी रेखा दुबे, विकास शिंदे और रिक्शा चालक रमेश हैं। रेखा के मुताबिक वह चार साल से बैंक में है और बिल कलेक्शन करती है। विकास के बारे में मैनेजर का कहना है कि वह सेवानिवृत्त कर्मचारी का बेटा है। ज्यादा काम होने पर हम उससे पार्टटाइम कराते हैं। ..और रिक्शा चालक रमेश के बारे में सभी का कहना है कि वह पहले भी रुपए ले जा चुका है।
घटनाक्रम के दौरान और बाद
>> रिक्शा चालक को मारपीट कर उतार दिया। बाद में वह घायल विकास को रिक्शा में ही जूनी इंदौर थाने ले गया। वहां से अस्पताल ले गया।
>> विकास के पैर पर हमला किया व रेखा को बाल पकड़कर खींचा।
>> श्री गुप्ता सहित रिक्शा में ये चारों थे।