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आगे बढ़ने के लिए दृढ़ चरित्र जरूरी

विकास मंत्र किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए साधना की जरूरत होती है। यह साधना तभी पूरी होती है, जब व्यक्ति अपने सिद्धांतों पर अटल रहता है। यदि आप किसी व्यवसाय या पेशे में सफलता पाने के लिए अपने सिद्धांतों से हटकर अपने आपको बेच देते हैं, तो क्या भविष्य में आप पर कोई विश्वास करेगा?

बिलकुल नहीं, भले ही आप सुशिक्षित, कुशल और अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ क्यों न हों? चरित्र का एकमात्र दोष ही आपके समस्त गुणों के प्रभाव को नष्ट कर देता है और आपकी साधना भंग हो जाती है। अत: जरूरी है कि आपका चरित्र स्वच्छ-निर्मल हो, आपका हृदय पारदर्शी हो, जिससे लोग आपको सदैव विश्वासपात्र मानें।

चरित्र व्यक्ति के नैतिक मूल्यों, विश्वासों और उसकी शख्सियत से मिलकर बनता है, जो उसके व्यवहार और कार्यो में झलकता है। इसे दुनिया की बेशुमार दौलत से भी ज्यादा संभालकर रखने की जरूरत है। चरित्र संसार की सब शक्तियों पर छा जाने वाली महाशक्ति है अर्थात जिसके पास चरित्र रूपी धन है, उसके सामने संसार भर की विभूतियां, संपत्तियां और सुख-सुविधाएं घुटने टेक देती हैं।

चरित्र बल से संपन्न व्यक्ति अपने जीवन उद्देश्य की पूर्ति में अडिग रहता है। वह अपनी स्वाभाविक प्रेरणा के अनुसार कार्य करता है अर्थात जो कार्य उसकी अंतरात्मा को स्वीकार नहीं, उसे वह नहीं करता। निश्चय ही ऐसा व्यक्ति जीवन में कभी हार नहीं सकता। हार-जीत तो उसकी प्रतीक्षा करती हैं, उसके पास चलकर आती हैं। उसकी सोच सकारात्मक होती है, क्योंकि वह सभी प्रकार के मनोविकारों से दूर रहता है। ऐसे व्यक्ति में एक चुंबकीय शक्ति होती है, जो सामने वाले को खींचने का काम करती है। लॉर्ड केनिंग ने शायद इसीलिए कहा है, ‘मैं चरित्र के रास्ते पर चलकर बल प्राप्त करूंगा, दूसरा रास्ता नहीं पकड़ूंगा।’





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