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विवाह स्थलों पर नियमों का पहरा

जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के सभी शहरों में चल रहे मैरिज प्लेसेज, वाटिका, हॉल तथा होटलों को नियमों के दायरे में लेते हुए शहरी निकायों को उदयपुर नगर परिषद की तर्ज पर बायलॉज लागू करने के निर्देश दिए। इसके बाद ऐसे सभी स्थलों का न केवल रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाएगा, बल्कि प्रदूषण फैलाने पर कठोर कार्रवाई भी की जाएगी।

सभी स्थलों का प्रारंभिक अनुज्ञा शुल्क पांच हजार रुपए होगा तथा बाद में प्रत्येक शादी या किसी भी आयोजन पर एक हजार रुपए जमा करवाने होंगे। हालांकि शहरी निकायों को विभिन्न आयोजनों व क्षेत्रों के अनुरूप यह शुल्क तय करने की छूट रहेगी। न्यायाधीश डा. विनीत कोठारी ने यह आदेश राजकुमार टाया सहित 12 अन्य लोगों की याचिकाओं पर दिए।

इनमें उदयपुर नगर परिषद की ओर से बनाए गए वाटिका बायलॉज को अवैधानिक, अव्यावहारिक होने के आधार पर चुनौती दी गई थी। जबकि परिषद की ओर से कहा गया कि यह बायलॉज नगरपालिका अधिनियम के तहत ही बनाए गए हैं। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश कोठारी ने बायलॉज को नियमों के दायरे में ही माना तथा व्यावहारिक रूप में इसे पूरे राज्य में लागू करने के निर्देश भी दिए।

और क्या-क्या कहा हाईकोर्ट ने

1. सभी शहरी निकाय एक महीने के भीतर अपने क्षेत्राधिकार के मैरिज प्लेसेज व वाटिकाओं का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करेंगे।
2. छह महीनों में इस संबंध में विस्तृत नियम-उप नियमों का निर्धारण करने के निर्देश। शुल्क वसूलने के बाद शहरी निकाय की यह जिम्मेदारी होगी कि ऐसे स्थानों के बाहर नियमित सफाई सुनिश्चित करवाए। इसका उल्लंघन करने पर अदालत व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर सकती है।
3. ध्वनि व वायु प्रदूषण सहित सोलिड वेस्ट की समस्या को देखते हुए शहरी निकाय ऐसे मैरिज प्लेसेज पर जुर्माना लगाने के लिए स्वतंत्र रहेंगी। यदि दोषी पक्ष जुर्माना अदा नहीं करता है तो शहरी निकाय नियमों के अनुरूप कार्रवाई कर सकेंगे।
4. पर्यावरण को होने वाले नुकसान, ड्रेनेज और सीवर सिस्टम के बाधित होने की आशंका को देखते प्लास्टिक कवर पर पूरे राज्य में प्रतिबंध। शहरी निकाय व अन्य एजेंसियों को ऐसे प्लास्टिक कवर की बिक्री, वितरण, खरीद और भंडारण पर अंकुश लगाने के निर्देश।
6. प्लास्टिक कवर पर प्रतिबंध के दायरे में विक्रेता ही नहीं, बल्कि निर्माता, खरीदार और आम आदमी भी आएगा। शहरी निकाय, अन्य एजेंसियों व पुलिस का यह दायित्व होगा कि वह नियमित रूप से प्रतिबंध की पालना सुनिश्चित करने के लिए पुस्तक विक्रेताओं, प्रिंटर्स तथा वितरकों के यहां जांच करे। दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ सक्षम नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।





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