जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में शुक्रवार को पाली के आवासीय क्षेत्र में चल रही रंगाई-छपाई की उन फैक्ट्रियों को संचालन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है जो प्रदूषण फैला रही हैं। इन फैक्ट्रियों को चार महीने में नए औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्ट करने के भी आदेश दिए हैं।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से ऐसी फैक्ट्रियों को बंद करवाने की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं को निस्तारित करते हुए हाईकोर्ट ने रीको को दो महीने में नए औद्योगिक क्षेत्र में सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने को कहा है।
न्यायाधीश मुनिश्वरनाथ भंडारी ने अरूणा मिल्स समेत 126 याचिकाओं की सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि पाली शहर में प्रदूषण फैला रही औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के संबंध में महावीर नगर विकास समिति की ओर से दायर याचिका में खंडपीठ चार साल पहले छह महत्वपूर्ण आदेश दे चुकी थी, लेकिन प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को छह महीने में नए औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्ट करने के आदेश की पालना अब तक नहीं हो पाई है। यदि अब भी इन फैक्ट्रियों को राहत दी गई तो न केवल जनस्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरा बरकरार रहेगा, बल्कि खंडपीठ के आदेशों की पालना भी नहीं हो पाएगी।
हाईकोर्ट ने 29 पेज के फैसले में कहा कि इस मामले में खंडपीठ के पूर्व आदेश की अवहेलना करने वाली किसी फैक्ट्री का संचालन नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा होता है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। इससे पहले याचिकाकत्र्ताओं की ओर से कहा गया था कि फैक्ट्री मालिक नए क्षेत्र में शिफ्टिंग को रजामंद हैं, लेकिन अब तक वहां बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं होने से उन्हें कुछ मोहलत दी जाए। कुछ मामलों में कृषि भूमि के औद्योगिक भू-परिवर्तन तथा ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ी होने के तथ्यों के आधार पर अदालत से राहत की याचना की गई।
जवाब में प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से कहा कि खंडपीठ के आदेशों की पालना में पहले ही 48 फैक्ट्रियों के बिजली कनेक्शन काटे जा चुके हैं। चार साल बाद भी शेष रही इन फैक्ट्रियों से न केवल प्रदूषण फैल रहा है, बल्कि ट्रीटमेंट प्लांट पर भी बोझ बढ़ गया है। रीको की ओर से कहा गया कि जैसे ही उद्यमी नए क्षेत्र में शिफ्ट होंगे, उनकी बकाया राशि जमा होते ही शेष रही सुविधाएं मुहैया करवा दी जाएंगी।
प्रदूषण निवारण ट्रस्ट के अधिवक्ता ने कहा कि मौजूदा ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाई जा चुकी हैं और नए प्लांट के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। यह प्लांट रीको के मौजूदा औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों के लिए होगा। जहां तक नए क्षेत्र का सवाल है, अलग प्लांट स्थापित किया जाना आवश्यक होगा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने यही कहा कि खंडपीठ के आदेश महत्वपूर्ण हैं और यदि अब भी कठोर कदम नहीं उठाए गए तो उनकी पालना करवाना अंतहीन हो जाएगा।
क्या कहा हाईकोर्ट ने >>
>> याचिका दायर करने वाली सभी ईकाइयों को नए औद्योगिक क्षेत्र में चार महीने में शिफ्ट करने के निर्देश, ताकि हाईकोर्ट के पूर्ववर्ती आदेशों के अनुसार आवासीय इलाके की इकाइयां शिफ्ट करने समेत नया औद्योगिक क्षेत्र ऑपरेशनल होने की पालना सुनिश्चित हो सके।
>> रीको टेक्सटाइल के लिए स्थापित किए जा रहे नए औद्योगिक क्षेत्र में सभी बुनियादी सुविधाएं दो महीनों में मुहैया करवाएगा।
>> फैक्ट्री मालिक रीको में बकाया राशि एक पखवाड़े में आवश्यक रूप से जमा करवाएं।
>> याचिका दायर करने वाली फैक्ट्रियां नए औद्योगिक क्षेत्र में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम-1974 के प्रावधानों के विपरीत प्रदूषित जल प्रवाहित नहीं कर सकेंगी।
>> हाईकोर्ट के आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए प्रदूषण निवारण ट्रस्ट्र, रीको, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य एजेंसियां समयबद्ध पालना सुनिश्चित करे, यह देखरेख का जिम्मा कलेक्टर का रहेगा। यदि आदेशों की समयबद्ध पालना नहीं होती है तो ऐसी फैक्ट्री को तत्काल बिना भेदभाव बंद करवाने की कार्रवाई की जाए। इसमें रही लापरवाही गंभीर होगी।
>> कोई याची बांडी नदी में प्रदूषित पानी का उत्प्रवाह नहीं कर पाएगा।
>> हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत किसी फैक्ट्री के संचालन की अनुमति नहीं दी जाए।
कौन-कौन आएगा दायरे में
आवासीय क्षेत्र में चलने वाली फैक्ट्रियों सहित ऐसी इकाइयां, जो भूमि या नदी में प्रदूषण फैला रही हों।