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शहर का कोई धणी-धोरी नहीं!

उदयपुर. यूआईटी की शुक्रवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में वित्तीय वर्ष 08-09 के बजट पर चर्चा होनी थी, लेकिन बैठक प्रोसेडिंग व संशोधित बजट पर ही खत्म हो गई। इस साल का बजट पारित ही नहीं हो पाया। ट्रस्टियों द्वारा आरोपों की झड़ी लगाने से सुबह सवा 11 बजे शुरू हुई बैठक शाम साढ़े तीन बजे स्थगित करनी पड़ी। ट्रस्टी युधिष्ठिर कुमावत ने एक मामला उठाते कहा कि ‘लगता है इस शहर का कोई धणी-धोरी ही नहीं रहा है।’

दो पुल क्यों बने :
बैठक में सचिव जोगाराम ने जैसे ही एजेंडा सुनाना शुरू किया तब आरोपों की बौछार शुरू हो गई। पहला मुद्दा भूपालपुरा व शोभागपुरा को जोड़ने के लिए दो पुल बनाने से उठा। ट्रस्टी राजेंद्र बोर्दिया ने कहा कि जब समिति की बैठक में मास्टर प्लान के अनुरूप भूपालपुरा पुलिस चौकी से सौभागपुरा तक एक ही पुल बनाना तय था, तो दूसरा पुल बनाने की क्या जरुरत थी। उन्होंने कहा कि यह क्या हो रहा है। ट्रस्टियों को तमाशबीन बने बैठे रहना पड़ता है। युधिष्ठिर कुमावत ने कहा कि दो पुल बनाने की जरुरत ही क्या है। इस मामले को लेकर चेयरमेन सनाढ्य पर सदन को गुमराह करने के आरोप भी लगे।

समय पर क्यों नहीं होती बैठक
ट्रस्टी कुंतीलाल जैन ने कहा कि एक माह में ट्रस्ट की बैठक करने का उन्होंने प्रस्ताव दे रखा है और दो माह में बैठक होना अनिवार्य है, तो फिर क्यों नहीं होती बैठकें। यह बैठक भी ढाई माह बाद हो रही है और यह सिर्फ बजट के लिए है। इस पर चेयरमैन शिवकिशोर सनाढ्य ने कहा कि बजट बनाया जा रहा था इस कारण समय नहीं मिला। कटारिया ने भी कहा कि इतना बड़ा बजट बना रहे हो तो उस पर चर्चा होनी चाहिए। सभी के सुझाव मांगे जाने चाहिए।

जमीन नहीं है, क्या करें :
गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि घरोंदा योजना के लिए गत बैठक में करीब पांच करोड़ के बजट में से केवल एक करोड़ ही खर्च हुआ है। यूआईटी स्कीम एरिया में भी कोई खास कार्य नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि मानीटरिंग के अभाव में यह गफलत है। इसके जवाब में सनाढ्य ने कहा कि जमीनें नहीं है तो कहां मकान बनाये जाए।

डीपीआर का समय बताओ
सचिव जोगाराम ने देहलीगेट व सूरजपोल पर प्लाईओवर बनाने की डीपीआर तैयार करवाने की बात कहीं, तो ट्रस्टी मांगीलाल जोशी ने कहा कि डीपीआर तैयार करने का समय बता दें। बातें तो पिछले दो साल से चल रही है। इस पर यूआईटी अधिकारियों ने कहा कि अधिकारियों की कमी के चलते यह कार्य नहीं हो पा रहा है। कटारिया ने कहा कि किसी भी प्राइवेट कंपनी से डीपीआर तैयार करवाई जा सकती है।

जोशी ने कहा ‘मैं अपमानित हुआ हूं’
निर्माण समिति अध्यक्ष मांगीलाल जोशी ने चेयरमैन शिवकिशोर सनाढ्य पर आरोप लगाया कि नियमों को ताक में रखकर उनकी समिति के कार्य व यूआईटी पेराफैरी के 62 गांवों का कार्य अन्य ट्रस्टियों को दे दिया गया। सनाढ्य के इस कृत्य से वह आहत, प्रभावित व अपमानित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी आदेश बिना सचिव के साइन के नहीं दिया जा सकता, जबकि चेयरमैन ने मनमर्जी से स्वयं के हस्ताक्षर कर उनसे उनकी समिति के कार्य छीन लिए। उन्होंने कहा कि स्वयं चेयरमैन भी बेबस, विवश और लाचार है। इसलिए निर्णय नहीं ले पाते हैं। उन्होंने कहा कि चेयरमेन नियमों से परे जाकर कार्य करना बंद करे। इस पर चेयरमेन श्री सनाढ्य ने कहा कि वह किसी को अपमानित करना नहीं चाहते। यह बात सामने आई थी कि पेराफैरी के गांवों में चल रहे विकास कार्र्यो में भ्रष्टाचार हो रहा है। इसलिए इन गांवों के विकास कार्र्यो की जिम्मेदारी अलग से कमेटी बनाकर ट्रस्टी कन्हैयालाल समदानी को सौंपी गई।

आवश्यकतानुसार जमीन अवाप्त करे :
विभूति पार्क को लेकर सचिव ने कहा कि पाल के बाद पड़ी खाली जमीन को अवाप्त किए जाने की कार्रवाई शुरू की जा रही है। इस पर ट्रस्टियों ने कहा कि पिछली बैठक में तय हुआ था कि तीन माह में पार्क से सटी 36 हजार हैक्टेयर जमीन अवाप्त करनी है, तो अब तक कार्रवाई शुरू क्यों नहीं हो पाई। इस पर कटारिया ने कहा कि इतनी जमीन अवाप्त करने में काफी दिक्कतें आएगी।

25 प्रतिशत सरेंडर स्कीम के तहत जमीन अवाप्त करो :
बैठक में भुवाणा में भूमि अवाप्त नहीं होने का मुद्दा छाया रहा। कटारिया ने कहा कि 25 प्रतिशत सरेंडर स्कीम के तहत देने की अगर यूआईटी कार्रवाई करेंगी, तो किसान आगे चल कर आएंगे।

अधिकारी नहीं मानते बात :
ट्रस्टी फूलसिंह मीणा ने कहा कि ठोकर चौराहे से मादड़ी तक सड़क बनाने के लिए कई बार अधिकारियों को कहा गया, लेकिन अधिकारी सुनते ही नहीं।

सिर्फ नियमन होता है :
ट्रस्टी पारस सिंघवी ने कहा कि यूआईटी में सिर्फ नियमन का ही कार्य होता है। बाकी सारे काम ठप पड़े हैं। अप्रैल माह के लिए 20 प्रतिशत बजट की स्वीकृति ली गई है। गत बजट के रिव्यू होने के बाद बैठक रखी जाएगी। बैठक अप्रैल माह के अंत तक हो जाएगी। पूर्व बजट के क्रियान्वयन में रही कमियों पर पुर्नविचार किया जाएगा। गत बजट में आय व व्यय, दोनों ही मदों में कमी हुई है, उसकी जांच की जाएगी।
-जोगाराम जांगिड़, सचिव, यूआईटी





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