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कम्प्यूटर पर हैकर्स का साया

उदयपुर. computerशहर की पुलिस चैन स्नैचर्स और चोरों के पीछे भाग रही है, लेकिन एक खामोश चोर कम्प्यूटर में सेंध लगा रहा है। मामले रिकार्ड में नहीं आने, शिकायतें मिलने पर पुलिस द्वारा गंभीरता से नहीं लेने की वजह से अपराधी कानूनी शिकंजे से बाहर हैं।

इंटरनेट के माध्यम से फ्रॉड यानी साइबर क्राइम दिनोंदिन बढ़ रहे हैं। डेढ़ सालों में शहर में ही अब तक साइबर क्राइम के पांच बड़े मामले उजागर हो चुके हैं। एक्सपर्ट्स की राय में ऐसे अनगिनत मामले हैं जो रिकार्ड में नहीं आ रहे, लेकिन किसी ना किसी तरह से इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोग ठगी या गलत हरकतों के शिकार हो रहे हैं।

उदयपुर में सक्रिय हैं हैकर्स
शहर में कम्प्यूटर हैकर्स की संख्या काफी अधिक है, लेकिन कोई सूचना तंत्र नहीं होने से इनके बारे में स्पष्ट रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं। छोटी मोटी ठगी के अलावा कंपनी या प्रतिष्ठान विशेष के सीक्रेट्स हैक करने या मस्ती के लिए किसी को परेशान करने के लिए हैकिंग की छोटी-मोटी घटनाएं होती रहती है।

पिछले तीन सालों में उजागर हुई बड़ी ठगी में नाइजीरिया के हैकर्स सामने आए हैं जिनका गिरोह मुंबई व दिल्ली में सक्रिय है। साइबर क्राइम सिक्यूरिटी सर्विस देने वाली कंपनी ऑरा ई सोल्यूशंस के सीएमओ अभिषेक धाबाई व श्वेता जोशी की मदद से पुलिस ने सभी मामलों में अन्वेषण किया है जिससे इनकी तह तक पहुंचने में कामयाबी मिली है।

इसलिए पुलिस विवश
ठ्ठ साइबर क्राइम के मामले समझने के लिए आईटी की समझ रखने वाली टीम चाहिए। उदयपुर में पुलिस विभाग में साइबर क्राइम की अलग शाखा नहीं है। ठ्ठ साइबर क्राइम की रिपोर्ट पुलिस किस धारा के तहत दर्ज करे इसे लेकर पसोपेश में रहती है। ठ्ठ सामान्य चोरी या ठगी की तरह साइबर अपराधों में सबूत नहीं मिलने से भी अधिकारी विवश होते हैं। ठ्ठ शहर में साइबर क्राइम को डील करने वाले कानूनी विशेषज्ञों की कमी भी अखरती है।

क्या है हैकिंग?
इंटरनेट से जुड़े असुरक्षित कम्प्यूटर्स से विशेष प्रकार के साफ्टवेयर के माध्यम से घुसपैठ करके कंपनी या व्यक्ति विशेष के गोपनीय डोक्यूमेंट या ई-मेल में सेंधमारी करना हैकिंग कहलाता है। यह सबसे प्रमुख साइबर क्राइम है जिसके लिए आईटी एक्ट 2000 के तहत विभिन्न धाराओं में कड़ी सजा व जुर्माने के प्रावधान हैं।

ठोस उपाय खोजेंगे हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी
हैंडीक्राफ्ट व्यवसायियों के साथ दो महीनों में साइबर क्राइम के दो मामले उजागर होने से एसोसिएशन का गठन किया गया है। संगठन के सचिव रंजन मेहता ने बताया कि 19 अप्रैल को पहली बैठक रखी गई है जिसमें साइबर क्राइम से सुरक्षा को लेकर कोई ठोस निर्णय पर विचार किया जाएगा। साइबर क्राइम संबंधी जो भी मामले आएंगे, उन्हें दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में तकनीकी पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
—अनिल पालीवाल, एसपी, उदयपुर

साइबर क्राइम के अब तक के बड़े मामले

>> जुलाई 2006 में नाइजीरिया के युवक फैथ ने लॉटरी खुलने के नाम से उदयपुर की पार्टी को चार करोड़ का लालच दिया। आरोपी को एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया।
>> एक शिक्षिका को काले डालर्स देने के झांसे में नाईजीरिया के ठग गिरोह ने मुंबई बुलाया। डालर्स पर काले रंग को हटाने के लिए दिए गए सोल्यूशंस के एवज में शिक्षिका से 9 लाख रुपए वसूले। मुंंबई-उदयपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद 9 लोगों को हिरासत में लिया गया।
>> एचआरएच ग्रुप में नाइजीरिया के एक व्यक्ति ने दूसरे के क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करके ई-मेल व वच्यरुअल नंबरों से संपर्क करके बुकिंग करवाई। कुछ दिनों बाद बुकिंग रद्द करवाकर उदयपुर में टूर एजेंट के नाम से अपने ही गिरोह के सदस्य के मार्फत ग्रुप से बुकिंग अमाउंट प्राप्त कर लिया।
>> इस साल मार्च में हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी देवेन्द्र जावलिया के ई-मेल हैक करके अपराधी ने बिजनेस डील स्वयं कर ली।
>> हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी रंजन मेहता के ई-मेल हैक करके विदेशों में उसके हस्तशिल्प व्यापार चौपट कर लाखों का बिजनेस हथियाने का मामला 8 अप्रैल को दर्ज हुआ।

ये हैं मुख्य साइबर क्राइम
>> लॉटरी स्केम, >> ई-मेल हैकिंग, >> बिजनेस लीड्स हैकिंग, >> क्रेडिट कार्ड स्केम





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