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बीमार उद्योगों को ’चंगा’ करने केंद्र की पहल

बिलासपुर. बीमार और बंद पड़े उद्योगों को उबारने के लिए वर्षो बाद केंद्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है। केंद्र सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय द्वारा अगले माह से पूरे देश में भर में एक सर्वे कराया जाएगा। इसमें औद्योगिक इकाइयों की क्षमता, उत्पादन, खरीदी-बिक्री व अन्य आंकड़े इकट्ठे कर केंद्र को भेजे जाएंगे। बंद उद्योगों में ‘जान’ फूंकने के लिए हो रहे इस सर्वे का जिम्मा उद्योग एवं व्यापार केंद्र को दिया गया है। बिलासपुर जिले में 5888 ऐसे उद्योग हैं, जहां सर्वे किया जाएगा।

राज्य सरकार ने बीमार उद्योगों को फिर से ‘जिंदा’ करने के लिए एक कमेटी बनाई है, लेकिन यह किन्हीं कारणों से अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सकी। शायद यही वजह है कि केंद्र सरकार सभी राज्यों में बीमार पड़े उद्योगों में रुचि ले रही है। ‘फोर्थ आल इंडिया सेंसस’ नामक इस सर्वे के संबंध में केंद्रीय मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, साथ ही सर्वे में पूछे जाने वाले बिंदुओं के बारे में भी बताया है। इसके मुताबिक उद्योगों का वार्षिक व मासिक टर्नओवर, उत्पादन, लोन-बैंकिंग, खरीदी-बिक्री, बिजली का उपयोग और उत्पादन में आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी ली जाएगी।

सर्वे में इकट्ठे किए गए आंकड़े केंद्रीय मंत्रालय को भेजे जाएंगे, जिसके अनुसार उद्योगों के हित में योजना तय की जाएगी। बीमार उद्योगों को फिर से प्रारंभ करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं या उन्हें क्या सहयोग किया जाए, यह भी सर्वे से तय होगा। यही नहीं, नियमित उद्योगों का अध्ययन कर उनकी रिपोर्ट भी मांगी गई है।

निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सर्वे केवल उन्हीं उद्योगों में किया जाए, जिनका पंजीयन 31 मार्च 2007 के पहले हो चुका हो। इसके बाद अस्तित्व में आ चुके ऐसे उद्योगों का ब्योरा केंद्र को भेजा जाएगा, जिनका पंजीयन अब तक नहीं हुआ है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सीके शुक्ला ने बताया कि सर्वे में जिला कार्यालय के अलावा विकासखंड स्तर पर नियुक्त उद्योग निरीक्षकों व प्रबंधकों के अलावा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इससे पूर्व उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रबंधक प्रमोद पाटनवार के अनुसार सर्वे की तारीख फिलहाल तय नहीं की गई है। माना जा रहा है कि मई के पहले हफ्ते में मंत्रालय द्वारा तारीख घोषित कर दी जाएगी।

उद्योग नीति में बदलाव के संकेत:
केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि उद्योगों की प्रकृति, उत्पादन व समस्याओं से संबंधित विस्तृत जानकारी इकट्ठी कर भेजी जाए, ताकि नीतिगत खामियां सामने आ सकें। इससे माना जा रहा है कि आने वाले समय में केंद्र सरकार उद्योग नीति में आमूल-चूल परिवर्तन कर सकती है।

गांव-गांव तक होगा सर्वे:
जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र की सर्वे टीम गांव-गांव तक जाकर सर्वे करेगी। शासन के निर्देश के अनुरूप खादी से जुड़े एवं ग्रामीण लघु उद्योगों में भी सर्वे किया जाना है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण रोजगार योजना के तहत रजिस्टर्ड लघु उद्यम की समस्याएं पूछी जाएंगी।

10 साल पहले लाखों उद्योगों पर गिरी थी गाज
आज से करीब 10 वर्ष पहले केंद्र सरकार ने एक सर्वे करवाया था, जिसमें देश भर के एक लाख से अधिक उद्योगों के पंजीयन पर गाज गिरी थी। बीमार व बंद पड़े उद्योगों के मालिक उन्हें या तो नहीं चलाना चाहते थे या फिर उनकी आड़ में मुनाफा कमाना चाहते थे। हालांकि मई में होने वाला सर्वे बंद पड़े उद्योगों के हित में किया जाएगा। लघु एवं सहायक उद्योग संघ के अध्यक्ष हरीश केडिया का कहना है कि कई उद्यमी स्वयं बंद उद्योगों को चालू नहीं करना चाहते। यही वजह है कि पूर्व में हुए सर्वे में जिले के भी कई उद्योगों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया था।

क्या है सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय
पिछले वर्ष केंद्रीय कृषि मंत्रालय एवं ग्रामीण उद्योग मंत्रालय को मिलाकर केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय बनाया गया था। इसके लिए उस समय के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा 9 मई 2007 को अधिसूचना जारी की गई थी। मंत्रालय का उद्देश्य इस स्तर के उद्योगों का संवर्धन, विकास एवं संरक्षण करना और जरूरतमंद परंपरागत उद्योगों को उनके पुनर्सृजन के लिए बने कोष से सहायता उपलब्ध कराना है। मंत्रालय के गठन के बाद पूरे देश में होने वाला यह पहला सर्वे होगा।





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