जयपुर. अभी आईआईटी का विवाद पूरी तरह सुलझा नहीं है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह कहां खुलेगी, यह तय नहीं है, लेकिन राज्य सरकार इसे अजमेर में खोलने पर विचार कर रही है। यदि सबकुछ ठीकठाक रहा तो अगले कुछ दिनों में केंद्र को अजमेर के नाम का प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
राज्य सरकार ने पिछले कई दिनों से चल रहे मंथन के बाद जयपुर, कोटा, उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर जैसे शहरों पर अजमेर को वरीयता दी है। अधिकारियों का कहना है कि अन्य शहरों में दो या इससे ज्यादा विश्वविद्यालय पहले से स्थापित हैं, जबकि अजमेर में फिलहाल एक ही विश्वविद्यालय है। यही नहीं, पिछले कुछ साल में अन्य स्थानों पर शैक्षणिक विकास अजमेर की तुलना में ज्यादा हुआ है। जयपुर के बारे में कहा जा रहा है कि यहां पहले से ही कई सरकारी और निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं।
यही नहीं, यहां बड़ी संख्या में कॉलेज हैं। इसके अलावा वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी भी जयपुर में प्रस्तावित होने के कारण सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए इसकी दावेदारी अपेक्षाकृत रूप से कमजोर है।
दूसरी ओर, जनप्रतिनिधियों पर यूनिवर्सिटी को अपने क्षेत्र में ले जाने का दबाव है। ज्यादातर ने इस मामले पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। कुछ ने मामले को मानव संसाधन मंत्रालय तक ले जाने की तैयारी कर ली है।
अजमेर की दावेदारी पर तर्क-
क्यों नहीं जयपुर-
राजस्थान विश्वविद्यालय सहित कई सरकारी, निजी विवि. और बड़ी संख्या में कॉलेज। वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी प्रस्तावित। राजधानी होने के कारण अन्य शहरों की तुलना में काफी एडवांस।
क्यों नहीं कोटा-
आईआईटी प्रस्तावित। कोटा विवि, तकनीकी विवि, महावीर कोटा विवि। कई मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट।
क्यों नहीं जोधपुर-
जयनारायण व्यास विवि, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, राजस्थान आयुर्वेद विवि.।
इसलिए नहीं उदयपुर-
मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी, जनार्दन राय नागर डीम्ड यूनिवर्सिटी, महाराणा प्रताप कृषि विवि। मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज। हाल ही में सिंघानिया विश्वविद्यालय खुला।
इनका कहना है
सरकार का प्रयास है सेंट्रल यूनिवर्सिटी अलग से बनें। इससे केंद्र के पैसे का पूरा उपयोग हो सके। अजमेर में एक ही विश्वविद्यालय होने से दावा मजबूत है, इसके बावजूद सभी स्थानों के दावों पर विचार किया जा रहा है।
-वासुदेव देवनानी, शिक्षा राज्यमंत्री
सरकार का प्रयास है सभी शहरों को शैक्षणिक दृष्टि से समानांतर विकास हो। बड़े शिक्षण संस्थाओं की स्थापना मेरिट पर होनी चाहिए। सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए अजमेर की दावेदारी तो है, लेकिन अंतिम फैसला केंद्र का होगा। प्रस्ताव भेजने से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
-अतुल गर्ग, प्रमुख शासन सचिव, उच्च शिक्षा
सेंट्रल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान के लिए जयपुर से बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता। सरकार ने गलत फैसला किया तो मानव संसाधन मंत्री को वस्तुस्थिति से अवगत कराएंगे।
-बृजकिशोर शर्मा, विधायक, जयपुर ग्रामीण
शिक्षण संस्थाओं की स्थापना जैसे मुद्दों को राजनीति से ऊपर उठकर सोचना होगा। सेंट्रल यूनिवर्सिटी उस स्थान पर बननी चाहिए जो प्रदेश के लिए हितकर हो।
-सी.पी.जोशी, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस
पिछड़े इलाकों को मिले तवज्जो-
शिक्षाविदों का एक वर्ग ऐसा भी है जो बड़े शिक्षण संस्थाओं को राज्य के सर्वाधिक पिछड़े इलाकों में खोलने का पक्षधर है। राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पी.सी.त्रिवेदी का कहना है कि अन्य शहरों का अपेक्षाकृत काफी विकास हो चुका है। बांसवाड़ा, डूंगरपुर जैसे आदिवासी पिछड़े जिलों को लाभ दिया जाना चाहिए। इन्फोनेट सेंटर के डायरेक्टर अशोक नागावत का कहना है कि सरकार का यह कदम पिछड़े जिलों को मुख्यधारा में आने के लिए कारगर साबित होगा।