बीकानेर. माध्यमिक शिक्षा विभाग में फर्जी तरीके से मेडिकल और टीए बिल का बजट जारी कर भुगतान उठाने के मामले में तीन प्राचार्य, एक पीटीआई तथा चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
माध्यमिक शिक्षा आयुक्त के.के. पाठक ने शुक्रवार को अलवर में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बहरोड़ के प्राचार्य सुमेर मेहता, पीटीआई परसराम, यूडीसी श्रीमती सरोज शर्मा, एसएमडी बालिका अलवर के कार्यालय सहायक हरिशंकर, जटवाड़ा रामावि के वरिष्ठ लिपिक सोहनलाल मीणा, अजमेर के जूनिया राउमावि के प्राचार्य शायरसिंह राठौड़, भिनाय राउमावि के प्राचार्य सुरेश शर्मा तथा जिला शिक्षा अधिकारी जयपुर (प्रथम) के कर्मचारी दिनेश शर्मा के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित पाए जाने पर उन्हें निलंबित करते हुए मुख्यालय माध्यमिक शिक्षा आयुक्तालय रखा गया है।
वित्त वर्ष 2007-08 की समाप्ति पर 31 मार्च को इस फर्जीवाड़े का पता चलने पर विभाग के होश उड़ गए। तुरत-फुरत संबंधित स्कूलों में टेलीफोन करके प्राचार्यो को भुगतान उठाने से मना किया गया तथा आदेश भी फेक्स किए गए। इन चारों स्कूलों ने करीब डेढ़ लाख रुपए का भुगतान उठा एकबारगी उठा लिया लेकिन कार्रवाई के डर से पैसा वापस उसी तिथि को बैंकों में जमा करवा दिया गया।
यह था मामला
माध्यमिक शिक्षा विभाग में फरवरी में मेडिकल और टीए बिल का करीब छह लाख रुपए का बजट जारी हुआ था। यह बजट 19 फरवरी को अजमेर और अलवर सहित विभिन्न जिलों की छह स्कूलों के लिए जारी किया गया था। आयुक्तालय के पास इसकी सूचना मार्च के अंतिम सप्ताह में पहुंची। आयुक्तालय के लेखा शाखा में जब एक-दो स्कूलों के प्राचार्यो ने 31 मार्च को इस बजट के संबंध में जानकारी मांगी तो इस फर्जीवाड़े का पता चल गया। विभाग ने सहायक लेखाधिकारियों के आंतरिक जांच दल से ऑडिट करवाई। जांच के बाद बजट जारी करने के फर्जीवाड़े में प्रथम दृष्टया तीन प्राचार्यो सहित आठ कर्मचारियों को दोषी पाया गया है।
जांच के प्रमुख बिन्दु
* माध्यमिक शिक्षा विभाग की मांग संख्या 24 में मेडिकल और टीए का बजट आबंटित होता है, जबकि फर्जी आदेशों में मांग संख्या ही अलग-अलग मिली है।
* मांग संख्या अलग-अलग होने के बाद भी बिल पारित करवाए गए, जबकि इस संबंध में पहले आयुक्तालय से छानबीन करनी चाहिए थी।
* आयुक्तालय से आबंटन के कागज कम्प्यूटराज जारी होते रहे हैं, जबकि वह पत्र टाइप किया हुआ था।
* मांग नहीं होने पर भी कुछ स्कूलों में बजट जारी कर दिया गया।
जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर आठ जनों को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच करवाई जाएगी।
के.के.पाठक, माध्यमिक शिक्षा आयुक्त