नई दिल्लीपिछले 60 साल से एक ब्रिटिश बैंक में पड़े हुए तीन करोड़ पाउंड यानी लगभग 2.37 अरब रुपए का असली मालिक कौन है- भारत या पाकिस्तान? भारत ने लंबे समय से जारी इस विवाद को कोर्ट से बाहर पाकिस्तान के साथ आपसी समझौते से निपटाने का फैसला किया है, जबकि हकीकत यह है कि यह पैसा भारत से ही गया था।
देश के विभाजन के बाद हैदराबाद निजाम के एक मंत्री ने गैर-कानूनी ढंग से लंदन की तत्कालीन नैशनल वैस्टमिंस्टर बैंक को करीब 10 लाख पाउंड यानी करीब 7 करोड़ 90 लाख रुपए सरकारी खजाने से ट्रांसफर कर दिए थे। 20 सितंबर 1948 को यह रकम पाक दूत हबीब इब्राहिम रहमतुल्लाह के नाम पर बैंक में जमा की गई थी।
न तो निजाम और न ही भारत को इस ट्रांसफर के बारे में जानकारी थी। पता चलते ही दोनों ने इस लेन-देन को चुनौती दी।
विवाद ब्रिटिश संसद के उच्च सदन में पहुंचा तो फैसला सुनाया गया कि इस रकम का कानूनी टाइटल पाक के नाम पर है, जबकि पाक सरकार ने रकम पर कभी मजबूत दावा पेश नहीं किया था। तब से खाता सील कर दिया गया। अब भारत व पाक के साथ ही निजाम के उत्तराधिकारी रकम को लेकर जटिल कानूनी लड़ाई में उलझे हैं।
अब यह रकम बढ़कर तीन करोड़ पाउंड हो चुकी है। शुक्रवार को कैबिनेट ने सरकार को यह इजाजत दे दी है कि मामले को पाक सरकार के साथ कोर्ट से बाहर आपसी समझौते से निपटा लिया जाए। सरकार से कहा गया है कि लंबे समय से अधर में लटके इस मामले को डेढ़ साल में सुलझा लिया जाए।
60 साल पुराना विवाद >> विभाजन से पहले हैदराबाद निजाम के एक मंत्री ने गैरकानूनी रूप से यह रकम जमा कराई थी। >> पता चलने पर निजाम और भारत सरकार ने इस लेन-देन को चुनौती दी और दावा जताया। >> ब्रिटिश संसद ने कहा राशि का कानूनी टाइटल पाक के नाम। पाक अपना दावा पेश नहीं कर सका। >> अब कैबिनेट ने सरकार से कहा- पाक के साथ बातचीत में डेढ़ साल में मामला सुलझा लिया जाए।