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Shekhawati Shekhawati सीकर. पाले और ओलों से पहले ही कमर तुड़वा चुके किसानों को अब आयकर के दायरे में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। किसानों को पैन कार्ड थमाकर इसकी शुरुआत की जा रही है। पैन कार्ड के जरिए विभाग कृषि आय का हिसाब-किताब जुटाना शुरू करने वाला है। यानी किसान कृषि से कितनी आय प्राप्त कर रहा है और कहां पैसा लगा रहा है इस सबकी जानकारी आयकर विभाग के पास होगी।
ध्यान रहे कि आयकर अधिनियम में कृषि से होने वाली आमद को आयकर के दायरे से मुक्त रखा गया है और किसानों को आयकर में छूट मिली हुई है। मगर अब वित्तीय कारोबार के साथ ही निवेश करने वाले किसानों को पैन कार्ड लेना अनिवार्य हो जाएगा। इस नई व्यवस्था का खाका तैयार कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार डाकघर की बचत योजनाओं में जो किसान 50 हजार रुपए जमा करेगा उनसे डाकघर पैन कार्ड की मांग करेगा।
कोई किसान विकास पत्र या राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र में 50 हजार रुपए या उससे अधिक राशि निवेश करेगा तो उसे पैन कार्ड दिखाना होगा। एडिशनल कमिश्नर प्रसन्नजीतसिंह का कहना है कि किसानों को पैन कार्ड दिए जाएंगे। जिसके बाद किसान लेन-देन पैन के जरिए ही कर पाएंगे। मकसद है कि किसानों की आय पर नजर रखी जाए।
पैन कार्ड बनाने की जिम्मेदारी
सरकार ने पैन कार्ड बनाने की प्रक्रिया के तहत दो कंपनियों नेशनल सिक्योरिटी डिपोजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) और यूटीआई इंवेस्टर्स सर्विसेज लिमिटेड (यूआईएसएल) को पैन कार्ड तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह दोनों कंपनियां पैन कार्ड खुद तैयार करने के बजाए अन्य कंपनियों से बनवाती हैं। किसानों को गांव में पैन कार्ड नहीं मिलेगा। इसके लिए उन्हें जिला मुख्यालय या गांव से सटे किसी शहर से पैन कार्ड जारी किया जाएगा।
सांकेतिक और शुरुआती प्रयास
आयकर क्षेत्र के जानकार किसानों को पैन कार्ड जारी करने को कृषि क्षेत्र में आयकर लागू करने की सांकेतिक और शुरुआती प्रक्रिया मान रहे हैं। विभाग के सूत्रों के अनुसार कृषि क्षेत्र में बड़े किसान विभाग से छिपकर कई योजनाओं में निवेश करते हैं। लेकिन आयकर से बाहर होने से इनकी कमाई पर नजर नहीं रखी जा सकती है।
आवाज उठाएंगे : अमराराम
किसान नेता अमराराम ने कहा कि किसानों की कमाई पर नजर रखना किसानों के साथ धोखा करने से कम नहीं है। इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे। किसान पहले से ही कर्ज, पाÝे और ओलों की मार झेल चुका है। सरकार किसानों के जीवन से मजाक करने की बजाए किसानों को लूटने वाले खातेदारों व व्यापारियों पर कार्रवाई करे तो अच्छा रहे। किसानों का नाजायज फायदा उठाने वालों पर तो कोई कार्रवाई नहीं करता, किसानों की पसीने की कमाई लूटने के लिए सरकार नए-नए दाव खेल रही है।