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एचआईवी पीड़ितों को टीबी का खतरा

नई दिल्ली. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि दक्षिण पूर्वी एशिया में एचआईवी संक्रमित लोगों को सर्वाधिक तपेदिक की मार झेलनी पड़ रही है।

डब्ल्यूएचओ ने यह रिपोर्ट भारत, म्यांमार, नेपाल और थाइलैंड में किए गए अध्ययन के आधार पर जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 5.2 फीसदी एचआईवी संक्रमित लोग तपेदिक से ग्रस्त हैं।

इसी प्रकार म्यांमार में 7.1 फीसदी, नेपाल में 3.1 फीसदी और थाईलैंड में 7.6 फीसदी लोग एचआईवी के साथ-साथ तपेदिक की भी मार झेल रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार सामान्य लोगों की तुलना में एचआईवी संक्रमित लोगों में इस रोग की चपेट में आने की संभावना 30 गुना अधिक हो जाती है।

विश्व के कुल एक-तिहाई तपेदिक रोगी भारत, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, म्यांमार, थाइलैंड, मालदीव, श्रीलंका, भूटान, नेपाल व उत्तरी कोरिया में रहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में एचआईवी पीड़ितों की संख्या 25 लाख हैं।

रिपोर्ट में थाईलैंड, म्यांमार सहित भारत के छह राज्यों कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड, आंध्र प्रदेश, मणिपुर और तमिलनाडु को एचआईवी के लिहाज से काफी संवेदनशील बताया गया है।

उक्त इलाकों में यह भयंकर रूप महामारी का रूप धारण करता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2006 में भारत के 14 राज्यों में संशोधित ‘ संशोधित राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन नियंत्रण कार्यक्रम’ (आरएनटीसीपी) के तहत 25,055 एचआईवी संक्रमितों में से 4,829 लोगों को तपेदिक रोग होने की पुष्टि की गई थी।





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