सीहोररोहित जब दो माह का था, तब उसका शरीर केवल हड्डियों का ढांचा था, लेकिन एक साल में ही वह हृष्ट-पुष्ट हो गया और उसका वजन करीब तीन किलो से बढ़कर 10 किलो हो गया। सीहोर जिले के ग्राम रामाखेड़ी के गोपाल मेवाड़ा का पुत्र रोहित कुपोषण का शिकार हो गया था।
इस कुपोषित बच्चे की हालत यह थी कि उसका शरीर सिर्फ ढांचा रह गया था। कुपोषण के चौथे ग्रेड में पहुंच गए इस बच्चे को उसकी मां कृष्णाबाई ने स्तनपान कराना बंद कर दिया था।
कृष्णाबाई को आशंका थी कि उसका दूध ठीक नहीं है, लिहाजा रोहित कुपोषण का शिकार होकर चौथे ग्रेड में चला गया। रामाखेड़ी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नंदा कुशवाह ने जब बच्चे की हालत देखी तो उन्होंने कृष्णाबाई को सलाह दी कि बच्चे को रोज स्नान कराओ।
साथ ही बच्चे को स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराकर उसका इलाज कराया। इसके चलते 15 दिन में ही बच्चे की हालत में सुधार आने लगा और एक साल में रोहित का वजन 10 किलो के लगभग हो गया।
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी वेदऋचा उपाध्याय बताती हैं कि इस कुपोषित बच्चे को कुपोषण से उबारने निरंतर उसकी देखभाल की गई और उसकी मां कृष्णाबाई को समय-समय पर सलाह दी गई, जिसके चलते आज यह बालक पूरी तरह से स्वस्थ है। जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. एसएस तोमर बताते हैं कि आमतौर पर एक साल के स्वस्थ बच्चे का वजन 10 किलो के आसपास होता है।
कुपोषण के चौथे ग्रेड में पहुंच चुका रोहित खान-पान और देखभाल के कारण तेजी से रिकवर हुआ है। अब उसका वजन सामान्य श्रेणी में आ गया है।