इंदौर. माणिकबाग ओवरब्रिज के पास शुक्रवार दिनदहाड़े यूनियन बैंक के हेड कैशियर ब्रजमोहन गुप्ता की हत्या व कर्मचारी विकास शिंदे को घायल कर करीब 20 लाख रुपए लूटने वाले बदमाशों का कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। वारदात के समय मौजूद रेखा दुबे के बयानों में विरोधाभास शंका पैदा कर रहा है। इस बीच ‘भास्कर’ की पड़ताल में सामने आया कि भारी रकम होने की जानकारी लुटेरों को बैंक से ही मिली। चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस की जांच बाइक के आधे-अधूरे नंबर और विकास व रेखा के बयानों पर चल रही है। कुछ रिक्शा चालक व नजदीकी लोग शंका के घेरे में हैं। एसपी ने बदमाशों की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। शुक्रवार रात एसपी अंशुमान यादव व एडीशनल एसपी मनोजसिंह रमेशचंद्र की रिक्शा में ही यूनियन बैंक, शिव विलास पैलेस से घटनास्थल तक गए और पूछताछ की।
मोतीतबेला के पास चालक ने बताया बदमाशों ने यहीं से पीछा किया जिस पर श्री गुप्ता ने जल्दी चलने को कहा। उधर, ‘भास्कर’ की पड़ताल में साजिश का मुख्य केंद्र बैंक व आसपास ही नजर आया। संदेह है बैंक से जुड़ा कोई शख्स और कोई रिक्शा चालक इसमें लिप्त है जिसने शुक्रवार को रुपए ले जाने की जानकारी दी। यह भी पता लगा कि अक्सर श्री गुप्ता के साथ रेखा व विकास ही कैश ले जाते थे। श्री गुप्ता पहले पूरे रुपए पेटी में पैक करते फिर दोनों में से किसी को रिक्शा लेने भेजते थे। आमतौर पर रिक्शा राजबाड़ा के पास स्टैंड से बुलाते थे। कभी-कभार किसी अन्य रिक्शा को भी रोक लेते थे। शुक्रवार को रेखा ने रमेशचंद्र को बुलाया था।
बयानों की टेढ़ी-मेढ़ी रेखा
>> रेखा ने शुक्रवार को कई बार कहा बदमाशों ने श्री गुप्ता को चाकू मारे लेकिन गोली चलने से इनकार किया। शनिवार को दोबारा पूछताछ में गोली चलाने की बात कही। (ऐसा क्यों?) शार्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गोली बताया गया है। चाकू का एक भी वार नहीं है।
>> रिक्शा चालक रमेशचंद्र ने बताया एक बाइक पर तीन बदमाशों को देखा लेकिन दूसरी बाइक नहीं देख पाया। रेखा ने बताया दूसरी बाइक पर भी तीन बदमाश थे जो पेटी लेकर भागे। क्या बाइक पर तीन बदमाश बड़ी पेटी लेकर भाग सकते हैं?
>> इसे वारदात के बाद की घबराहट कहें या स्वभाव। रेखा हर बार बिना सोचे-समझे कुछ भी कह देती है। कल उसने कहा था सभी बदमाश रुमाल बांधे थे। आज कहा तीन बदमाश ही रुमाल बांधे थे। बाकी तीन दुबले-पतले, खुले मूंह थे। ऐसा तो नहीं कि रेखा ने रुपए भेजने की बात अचानक कहीं कह दी हो जिस पर नजदीकी लोगों ने साजिश रची हो।
>> चालक रमेशचंद्र 35 साल से राजबाड़ा स्टैंड से सवारियां बैठाता है। कई बार बैंक से रुपए भी ले गया। पिछले हफ्ते नारायण, उससे पहले आबिद व अन्य रुपए लेकर चेस्ट शाखा गए थे। रेखा व अन्य कर्मियों का दावा है सभी विश्वासपात्र हैं, तो बात कैसे लीक हुई?
>> वारदात के पहले नजदीकी व्यक्ति और बदमाश मोबाइल के जरिए संपर्क में थे। इसका राज कॉल डिटेल्स से ही खुल सकता है।
कुछ ऐसे हुई वारदात
वारदात की साजिश 10-15 दिन में रची गई और बदमाशों ने रास्ता ऐसा स्थान चुना जहां से भाग सकें। बैंक के ही किसी सूत्र ने 19.50 लाख रु. पेटी में पैक करने के संकेत दिए तो वे बैंक के पास पहुंचे और पीछाकर वारदात को अंजाम दिया।
नौ ही लोग हैं स्टाफ में
बैंक में श्री गुप्ता के अलावा ब्रांच मैनेजर, एक अकाउंटेट, दो सीटीओ (कम्प्यूटर टर्मिनल ऑपरेटर), एक स्पेशल असिस्टेंट, प्यून (रेखा), स्वीपर व विकास शिंदे (बैंक का कर्मी नहीं) ही काम करते हैं। रुपए की जानकारी सभी को रहती थी।
सिक्युरिटी गार्ड की जानकारी नहीं
शुक्रवार को ब्रांच मैनेजर नरेंद्रमोहन पंत ने बताया सिक्युरिटी गार्ड के लिए कई बार जोनल ऑफिस को लिखा गया। इस पर भोपाल में पदस्थ सीनियर मैनेजर मेजर चेहल ने बताया मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ की कई शाखाओं से ऐसे पत्र आते रहते हैं। इंदौर ब्रांच ने ऐसा कोई पत्र लिखा या नहीं, देखकर ही बता सकते हैं। वैसे वहां कुछ साल पहले एक गार्ड था जिसका तबादला हो गया था।
पार्किग में बिना नंबर की सात बाइक
वारदात के बाद भी लापरवाही का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि शनिवार को बैंक के पास की पार्किग में बगैर नंबर की सात बाइक खड़ी थीं। पार्किग संचालक गिरधर गोपाल ने बताया घटना के विरोध में स्टैंड बंद है।
‘घासलेट छिड़ककर जला लूंगी’
मुख्य प्रत्यक्षदर्शी रेखा व चालक रमेशचंद्र को लेकर पुलिस शनिवार दोपहर फिर बैंक पहुंची। तब एक महिलाकर्मी ने रेखा पर तानाकशी की तो वह भड़ककर बोली एक तो श्री गुप्ता को लेकर अस्पताल गई। उसके बाद भी सब मुझे शक की नजर से देखते हैं। मैं अब घासलेट छिड़ककर खुद को जला लूंगी और चीखने लगी। तब पुलिस अधिकारियों ने उसे समझाया।