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कुछ और कालेजों पर गिरेगी गाज

रायपुर. पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय कुछ और कालेजों पर प्रतिबंध की कार्रवाई कर सकता है। यूजीसी के परिनियम 28 का पालन नहीं करने के मामले में भिलाई और रायपुर के दो कालेज निशाने पर हैं। 15 अप्रैल को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा।

शहर के प्रतिष्ठित सेंट विसेंट पैलोटी कालेज पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद दूसरे कालेजों के बचने की संभावना नहीं दिखाई दे रही। रविवि ने रामनगर भिलाई स्थित इंदिरा गांधी कालेज को परिनियम 28 के तहत शिक्षकों की नियुक्ति करने की नोटिस दी। लेकिन कालेज ने इसे नहीं माना।

विवि इस मामले को लेकर कालेज की संबंद्धता समाप्त करने का प्रस्ताव ला रहा है। इसी तरह हीरापुर स्थित आनंद कालेज ने अल्पसंख्यक संस्थान का हवाला देते हुए परिनियम से छूट मांगी है। इस मसले पर भी कार्यपरिषद में चर्चा होगी। विवि ने अल्पसंख्यक संस्थान द्वारा संचालित सेंट विसेंट पैलोटी कालेज के छात्रों को परीक्षा से वंचित किया था। इसलिए इसे भी छूट मिलने की संभावना कम दिखती है। 18 कालेजों में पहले ही प्रथम वर्ष में प्रवेश प्रतिबंधित किया जा चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कार्य परिषद में इसके अलावा 24 और बिंदु हैं। जिसमें कर्मचारियों से संबंधित प्रस्ताव भी हैं।

खाली सीटों में सीधी भर्ती
नर्सिग कालेजों में भर्ती के लिए इस साल आयोजित की गई प्रवेश परीक्षा काफी विवादित रही। नर्सिग कालेजों ने प्रवेश परीक्षा के आधार पर काउंसिलिंग के बाद बची सीटों में सीधी भर्ती करने की अनुमति मांगी है। कार्य परिषद में इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी। नर्सिग कालेजों में दूसरे राज्यों के बहुत अधिक छात्र प्रवेश लेते हैं। इसलिए निजी कालेज छूट मांग रहे हैं।

विवि में इस तरह का कोई नियम नहीं बना है जिससे निर्धारित हो सके कि कालेजों में कितने प्रतिशत बाहरी छात्रों को प्रवेश दिया जा सकता है। निजी कालेज बाहरी छात्रों से मोटी रकम लेकर प्रवेश देते हैं। इसी तरह का अनियमितता पहले बीएड कालेजों में हुई थी। राज्य सरकार ने इस पर अंकुश लगाने के लिए नियम बनाया था।

डा. त्रिपाठी को मिल सकती है राहत
बैठक में उस आदेश को निरस्त करने का प्रस्ताव रखा जाएगा जिसमें प्रोफेसर डा. बीपी त्रिपाठी को परीक्षा कार्य से वंचित किया गया है। कार्य परिषद के सदस्य इस पर निर्णय लेंगे। व्यापमं में नियंत्रक के पद पर साइंस कालेज के डा. त्रिपाठी की प्रतिनियुक्ति की गई। लेकिन डा. त्रिपाठी द्वारा उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में त्रुटियां की गई। इस वजह से रविवि ने उन्हें पांच साल के लिए परीक्षा कार्य से वंचित कर दिया था।





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