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आंधी की मार्बल खदानों में शुरू होगा खनन

जयपुर. लंबे अरसे से बंद पड़ी आंधी की खदानों से फिर मार्बल निकालने की तैयारी की जा रही है। नियमानुसार खदानों को शुरू कराने के लिए उच्च स्तर पर मामले की फिर से समीक्षा की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार क्षेत्र की 57 खदानों में पांच सालों से खनन कार्य बंद पड़ा है।

सूत्रों के अनुसार खान एवं भूविज्ञान विभाग ने जमवारामगढ़ अभयारण्य की सीमा से सटे इस क्षेत्र की मार्बल खदानों को शुरू कराने के लिए कवायद शुरू कर दी है। इस मामले की अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर पर समीक्षा की जा रही है। शीघ्र ही इस संबंध में उच्च स्तर पर बैठक आयोजित की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन अंतरिम याचिका संख्या 1000 के तहत न्यायालय की सुनवाई और दिए गए निर्देशों को ध्यान रखते हुए खनन कार्य शुरू कराने के लिए सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। सभी संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि अभयारण्य क्षेत्र के नजदीक होने व पर्यावरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी के निर्देश पर मई 2003 में इन खदानों में खनन कार्य बंद कराया गया था। न्यायालय ने इस संबंध में अभयारण्य और राजस्व भूमि का डिमार्केशन करने के बाद ही खनन कार्य करने को कहा था। सरकार ने डिमार्केशन तो करा दिया, मगर खदानें शुरू नहीं हो सकीं।

करोड़ों के राजस्व व हजारों को रोजगार का मामला: आंधी क्षेत्र में मार्बल की खदानों के शुरू होने से सीधे तौर पर 5 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और सरकार को रॉयल्टी के रूप में 6 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। इसके अलावा वैट व अन्य कर से सरकार को अलग से आय होगी।

14 खदानों के लिए मांगे जाएंगे आवेदन: आंधी क्षेत्र में खनन कार्य शुरू होने के बाद 14 खदानों के लिए नए सिरे से आवेदन मांगे जाएंगे। इन खदानों की लाइसेंस अवधि समाप्त होने से खनन पट्टे निरस्त हो गए हैं। इनके नवीनीकरण के लिए भी फिलहाल कोई आवेदन नहीं लगा है।

इनका कहना है >>
‘सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि आंधी क्षेत्र की खदानों में खनन कार्य फिर शुरू हो जाए। इस मामले में होने वाली अगली सुनवाई के लिए तैयारी की जा रही है ताकि सरकार की ओर से अदालत में मजबूती से पक्ष रखा जा सके।
- लक्ष्मीनारायण दवे, खानमंत्री

‘इस मामले से जुड़े तथ्यों को दुबारा परीक्षण कराया जा रहा है। इसमें सरकार की ओर से शपथ पत्र पेश किया हुआ है। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
- अशोक सिंघवी, सचिव, खान एवं भूविज्ञान विभाग





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