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वोटों के कारण नहीं करने दे रहे परमाणु करार : राज्यपाल

जयपुर. राज्यपाल एस. के. सिंह ने परमाणु करार मुद्दे पर वामपंथी और दक्षिण पंथियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि केवल विचारधारा या राजनीतिक कारणों से राष्ट्रहित को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

चरम वामपंथी और दक्षिणपंथी वोटों की राजनीति और स्वार्थो के कारण इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसा करके वे देश को पीछे धकेल रहे हैं। इस मुद्दे पर यूपीए सरकार को गिराने से देशवासियों का भला नहीं होगा। राज्यपाल शनिवार सुबह यहां इंदिरा गांधी पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास संस्थान में एक समारोह में बोल रहे थे।

यह समारोह द इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स की ओर से 39वीं मिड टर्म सिम्पोजियम ऑन रिसेंट एडवांस इन ब्रॉड बैंड सिस्टम्स विषय पर हुआ। उन्होंने कहा कि विश्व परिदृश्य में हमारी पहचान बनाने में परमाणु करार उपयोगी तो होगा ही साथ ही इससे हमारी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि आणविक शक्ति से बिजली बनाने का काम आसान व सस्ता नहीं है।

भारत और अमेरिका इस पक्ष में हैं कि चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन को मिल रहे लाभ भारत को भी मिलने चाहिए। कुछ राजनीतिक दल इस बात का भ्रामक प्रचार कर रहे हैं कि भारत और अमेरिका के बीच कोई भी संधि भारत के लिए लाभदायक नहीं रही है। ऐसी विचारधारा के लोग यह भूल जाते हैं कि वे देश को पीछे धकेल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने देश के विकास में सूचना प्रौद्योगिकी के महत्व को समझकर एक मिशन बनाया था। इसी कारण भारत इस समय सॉफ्टवेयर में दक्षता पा सका है और उसकी आमदनी तथा निर्यात बढ़े हैं।

आरक्षण पर भी बोले: आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था से त्रस्त लोगों को राहत देने के लिए हमारे संविधान में आरक्षण को स्थान दिया गया था। लेकिन यह भी सच है कि आज जातीय व्यवस्था के कारण समाज में विघटन और संघर्ष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान में तो दलितों को समानता के अधिकार दिए, लेकिन आज भी समाज में भेदभाव और असमानता स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह समझते हैं कि दलितों को नौकरियों और शिक्षा में कुछ विशेष लाभ देकर अस्पश्र्यता जैसी बुराईयों की कीमत चुक जाएगी।





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