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फ्यूजन या कंफ्यूजन!

अजमेर. मशहूर सितारवादक उस्ताद सईद जफर का मानना है कि फ्यूजन से शास्त्रीय संगीत को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि बदलते जमाने के साथ शास्त्रीय संगीत का स्तर भी गिर रहा है। लोग शास्त्रीय वाद्यों के साथ ड्रम्स का उपयोग कर उसे फ्यूजन का नाम दे रहे हैं। कोई भी कुछ गड़बड़ी करता है तो उसे फ्यूजन का नाम दे दिया जाता है। यह भले ही संगीत रसिकों की समझ में आए या न आए। वह शनिवार को ‘भास्कर’ से बातचीत कर रहे थे।

बनावटीपन पर जोर
सितार के उस्ताद का कहना था कि अब गाना-बजाना पहले जैसा नहीं रहा। अब लोगों का बनावटीपन पर ज्यादा जोर है। जो लोग सीना-ब-सीना सीखते हैं, वही सही मायनों में गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हैं। अब लोग कैसेट और किताबों से संगीत सीख रहे हैं। यह फन के साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या है।

बिना मेहनत के सफलता की चाह
पं. निखिल बनर्जी अवार्ड, बाबा हरिबल्लभ अमृतसर अवार्ड और नाद रत्न सम्मान से सम्मानित सईद जफर ने कहा कि शास्त्रीय संगीत के लिए कड़ा रियाज जरूरी है। करीब 16 घंटे मेहनत करने के बाद कोई चीज प्राप्त होती है। लोग बिना मेहनत के ही सफल कलाकार बनना चाहते हैं।

सपरिवार जियारत
उस्ताद सईद जफर ने शाम को सपरिवार दरगाह जियारत की। उन्होंने ख्वाजा गरीब नवाज की मजार पर मखमल की चादर और अकीदत के फूल पेश कर मन्नत मांगी। उन्हें सैयद सादिक अली चिश्ती ने जियारत कराई।





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