भोपाल.
राज्य सरकार चुनाव वर्ष में प्रदेश की लीज होल्ड जमीन फ्री-होल्ड करने की तैयारी कर रही है। इससे सरकार को एक मुश्त लगभग एक हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। हालांकि तीन साल पहले भी इस संबंध में एक प्रस्ताव लाया गया था,लेकिन तब वित्त विभाग की आपत्ति के चलते यह मंजूर नही हो पाया था। इसके बाद से मंत्रालय में धूल खा रही इस फाइल को अब पंख लग गए हैं।
घोषित तौर पर यह काम मकान बनाने वाली सरकारी एजेंसियों को निजी बिल्डर्स से प्रतिस्पर्धा आगे करने के लिए उठाया जा रहा है, किंतु हकीकत यह है कि इसके जरिए सरकार कुछ ऐसे राजनेताओं और रिटायर्ड अफसरों को उपकृत करना चाहती है जिन पर भारी लीज रेंट बकाया है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में पिछले पांच दशक में सरकार ने बड़े पैमाने पर शहरी क्षेत्रों में नजूल भूमि लीज पर दी है। इनसे हर साल वार्षिक लीज रेंट लिया जाता है। समय के साथ यह लीज रेंट बढ़कर अब कई पूर्व राजनेताओं और सेवानिवृत्त अफसरों को भारी पड़ रहा है। इससे छुटकारा पाने के लिए फ्री-होल्ड लागू किया जा रहा है।
अब तक क्या तैयारी: इसके लिए बाकायदा राजस्व विभाग ने संक्षेपिका तैयार कर ली है। शीघ्र इस प्रस्ताव को कैबिनेट बैठक में लाकर मंजूरी दिए जाने के आसार हैं।नजूल जमीन को भूमि स्वामी अधिकार पर देने का वर्तमान में कोई प्रावधान नहीं है। इससे बाजार दर पर प्रीमियम राशि लेने के बाद वार्षिक लीजरेंट का भुगतान करना अत्यधिक कठिन होता है। इसके विपरीत अगर कोई व्यक्ति निजी जमीन खरीदता है तो उसे लीजरेंट नहीं देना पड़ता है।
क्या है दिक्कत
गृह निर्माण मंडल और विकास प्राधिकरण को नजूल भूमि आवंटित करने पर उनसे बाजार दर पर प्रीमियम तथा लीजरेंट लिया जाता है,जबकि ये संस्थाएं अगर निजी जमीन का अर्जन करना चाहे तो उसके लिए अर्जित की जाने वाली भूमि का बाजार मूल्य तथा उसपर 30 प्रतिशत सोलेशियम देय होता है। फिर इस जमीन का आवासीय उपयोग के लिए डाइवर्शन कराना होता है। इसके लिए अलग से राशि चुकाना पड़ती है। इस वजह से सरकारी एजेंसियां जो मकान बनाकर बेचती है,उनकी कीमत प्राइवेट बिल्डर की तुलना में ज्यादा होती है।
क्या है विकल्प
लीजरेंट की राशि को लेंड रेवेन्यू की राशि के बराबर तय कर दिया जाए। अगर ऐसा कोई लीजधारक आवासीय भूमि का उपयोग बदलकर व्यवसायिक करना चाहता है तो उसे तय भू-राजस्व के बराबर राशि लीजरेंट के रूप में देना होगी। लीजधारकों के लिए यह प्रावधान रखा जाए कि अगर वे चाहे तो लीज होल्ड जमीन को एकमुश्त लीजरेंट जमा कराकर फ्री-होल्ड करा सकते हैं।
क्या आपत्ति थी वित्त विभाग की
भूमि जैसे सीमित रिसोर्स को मौजूदा स्थिति में ही पूर्णत:सेटल करने से सरकार के भविष्य के वित्तीय स्रोत सूख जाएंगे। यह आगे की वित्तीय व्यवस्था के लिए जटिल समस्या साबित होंगे। स्वस्थ वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से ऐसा करना उचित नहीं होगा।
कैसे होगा परिवर्तन
लीज धारक को जमीन का मालिकाना हक हासिल करने के लिए एक मुश्त लीजरेंट चुकाना होगा। इसकी दर नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों में आबादी के मान से तय करने का प्रस्ताव है। मसलन भोपाल शहर में 2400 वर्गफुट के भूखंड को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने के लिए परिवर्तन फीस 10 हजार रुपए रखी जाएगी,जबकि इसी आकार के प्लाट के लिए नगर पंचायत क्षेत्र में यह फीस एक हजार रुपए रखी जा सकती है।
कितना लगता है लीज रेंट
आकलन के मुताबिक अरेरा कालोनी भोपाल में अगर नया नजूल जमीन का स्थाई पट्टा 1500 वर्गफुट का दिया जाता है तो उस पर देय 12.75 लाख रुपए की प्रीमियम पर 64 हजार रुपए सालाना लीज रेंट लगता है। इसी तरह 2400 वर्गफुट का प्लाट 20.40 लाख रुपए प्रीमियम पर लेने के बाद उस पर सालाना 1.02 लाख रुपए लीज रेंट लगता है। इसके औचित्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं।