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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. नगर निगम प्रशासन के मुताबिक ५५ वार्डो में विभक्त शहर के विभिन्न मुहल्लों में करीब ३ हजार सार्वजनिक नल हैं। शहर के ज्यादातर मुहल्लोंे के गरीब परिवारों का गुजर-बसर इन्हीं सार्वजनिक नलों से होता है। इन सार्वजनिक नलों में से तकरीबन ८क्-९क् फीसदी नलों में सालों से टोंटियां ही नहीं हैं, जिसकी वजह से पानी नाले-नालियों में व्यर्थ बह जाता है।
नगर निगम द्वारा पंप हाउसों या टंकियों के माध्यम से सुबह ६ से ११ बजे तक पांच घंटे व शाम ५ बजे से रात आठ बजे तक तीन घंटे जलापूर्ति की जाती है। निगम प्रशासन के जानकार अफसरों के मुताबिक एक सार्वजनिक नल से प्रतिदिन प्रति घंटे में १ हजार लीटर जल की आपूर्ति की जाती है। इस हिसाब से आठ घंटे में प्रतिदिन प्रति नल से ८ हजार लीटर जलापूर्ति की जाती है।
चांटीडीह, चिंगराजपारा, जरहाभाठा, तालापारा, मगरपारा जैसे मुहल्ले में सुबह से इन नलों के आसपास बर्तनों के ढेर लग जाते हैं। इसके बाद इन नलों से करीब दो से ढाई घंटे पानी व्यर्थ ही नाले-नालियों में बहता रहता है। इस हिसाब से निगम के टोंटी विहीन नलों से प्रतिदिन करीब सात से आठ लाख लीटर पानी रोजाना नाले नालियों में बह जाता है। ऐसा नहीं है कि निगम के अफसरों को इसकी जानकारी नहीं है। उनका दावा है कि कई बार इन सार्वजनिक नलों में उनके द्वारा टोंटियां लगाई जा चुकी हैं, लेकिन नशे के आदि शरारती तत्व इन नलों से आए दिन टोंटियां चोरी कर ले जाते हैं।
इधर गर्मी तेज होते ही देश के अन्य प्रांतों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इंदौर व भोपाल जैसे कई शहरों में स्वयं निगम व जिला प्रशासन के अफसर पानी की किल्लत को देखते हुए जलदेवता को खुश करने के लिए हवन-पूजन जैसे आयोजन कर रहे हैं। वहां जलस्रोत के नीचे गिरने से टंकियां सूखी पड़ी हुई हैं, लोग ५-७ किलोमीटर से पानी परिवहन कर उपयोग के लिए ला रहे हैं, ऐसे में पानी के इस तरह हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए निगम प्रशासन के पास कोई इंतजाम नहीं है।
विकास के लिए करोड़ों रुपए की बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने वाले निगम के योजनाकार भी रोजाना बहने वाले सात आठ लीटर व्यर्थ बहने वाले पानी को रोकने में विवशता बता रहे हैं। समय-समय पर शहर में जल संरक्षण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। निगम के अफसर व इंजीनियर ऐसे आयोजनों में भाग भी लेते हैं, लेकिन ऐसे आयोजनों का लाभ कितना मिलता है, यह दिख रहा है।
वाटर मैनेजमेंट भी फेल
नगर निगम प्रशासन ने एक उपयंत्री को निगम के खर्चे पर ही वाटर मैनजमेंट का कोर्स करने भेजा था, वे वर्तमान में उसी विभाग में पदस्थ हैं, इसके बावजूद उनके अनुभवों का लाभ पता नहीं क्यों निगम प्रशासन को नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में गंभीरतापूर्वक कोई योजना बनाने के बजाए उन्हें पंप फेल होने या पाइप लाइन में होने वाली गड़बड़ी को देखने व उनको दुरुस्त करने में लगाया जाता है।