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राजस्थान में फायदे का सौदा नहीं रहा वैट

जयपुरदेशभर में समान टैक्स प्रणाली लागू करने के उद्देश्य से लागू किया गया मूल्य संवर्धित कर (वैट) राजस्थान के लिए फायदेमंद नहीं रहा। इससे दो साल में दो हजार रुपए की आय तो बढ़ी, लेकिन टैक्स की विकास दर में कोई इजाफा नहीं हुआ। व्यापारियों के भी करीब 350 करोड़ रुपए वाणिज्य कर विभाग में अटके हुए हैं।

अब केन्द्र सरकार राज्यों पर वैट की दरें बढ़ाने के लिए दबाव डाल रही है, जबकि जबर्दस्त महंगाई और चुनावी साल के कारण राज्य व्यापारियों और जनता की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते। दूसरा कारण यह भी है कि 1 अप्रैल से ही वैट की दर घटाई-बढ़ाई गई हैं। अब यदि इसमें दुबारा फेरबदल हुआ तो कांग्रेस को मुद्दा मिल जाएगा। इधर, केन्द्र सरकार पर भी केन्द्रीय बिक्री कर (सीएसटी) की दर एक फीसदी कम करने का दबाव बना हुआ है। अभी यह तीन प्रतिशत है और एक इसे अप्रैल से दो प्रतिशत किया जाना था।

इससे होने वाले नुकसान की भरपाई को लेकर केन्द्र और राज्यों में सहमति नहीं बन पा रही है। आठ अप्रैल को दिल्ली में हुई वित्त मंत्रियों की बैठक में राज्यों ने वैट की दरें बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया था। अब 16 अप्रैल को फिर बैठक होने जा रही है। वैट समस्या निराकरण समिति के अध्यक्ष एस.एन.गुप्ता का कहना है कि राज्य सरकार किसी भी हालत में वैट की दर नहीं बढ़ाएगी।

दिल्ली में फिर हो रही बैठक में हम राज्य का पक्ष मजबूती से रखेंगे। बात नहीं बनी तो केन्द्रीय वित्तमंत्री से बात करेंगे।

व्यापारियों के भी अटके 366 करोड़

राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के महामंत्री बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि वाणिज्यकर विभाग में वैट रिफंड के रूप में व्यापारियों के करीब 366 करोड़ रुपए अटके हुए हैं। सेल्स टैक्स में तो हाथोंहाथ रिफंड मिल जाता था अथवा समायोजन हो जाता था, लेकिन वैट में समायोजन का तो प्रावधान ही नहीं है। रिफंड भी साल के अंत में करने का प्रावधान है।

इसलिए हैं मतभेदकेन्द्र चाहता है कि राज्य सरकारें अपने यहां वैट की दर 4 से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दें। इससे जो राजस्व मिलेगा, उसे केन्द्रीय करों का हिस्सा माना जाएगा। उधर, राज्य सरकार का कहना है कि वैट राज्य का अधिकार है, केन्द्र को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। वित्त विभाग के अनुसार अगर केन्द्र सरकार सीएसटी की दर एक फीसदी घटा देती है, तो राज्य को लगभग 500 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। राज्य सरकार केन्द्र से इस पूरी राशि के नुकसान की भरपाई की मांग कर रही है।

राज्य के वाणिज्यिक कर आयुक्त मुकेश शर्मा का कहना है कि वैट लागू होने से पहले भी टैक्स की विकास दर 15 प्रतिशत थी और आज भी उतनी ही है। आय के हिसाब से पहले जहां लगभग 5,000 करोड़ रुपए का कर राजस्व मिलता था, वह अब बढ़कर 7,700 करोड़ हो गया है।

पुराना पूरा नहीं मिला, अब फिर उम्मीद : वैट लागू करने के बाद केन्द्र ने जब सीएसटी की दर 4 से घटाकर 3 प्रतिशत की थी, तब राजस्थान को 250 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इसके तहत तंबाकू पर वैट लगाने से सरकार को करीब 110 करोड़ रुपए मिले थे, बाकी 140 करोड़ केन्द्र सरकार से मिलने थे, अभी तक 126 करोड़ रुपए ही मिले हैं।

क्यों जरूरी है सीएसटी घटाना : केन्द्र सरकार के देशभर में समान टैक्स प्रणाली लागू करने का फैसले के तहत बिक्रीकर (सेल्स टैक्स) को खत्म करके वैट लगाया है। इसलिए केन्द्रीय बिक्री कर (सीएसटी) को चरणबद्ध तरीके से 4 साल में खत्म किया जाना है। इससे राज्यों को होने वाले टैक्स के नुकसान की भरपाई केन्द्र सरकार को करनी है।





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