टोंककई वर्षो से जिला जेल के दो सौ से अधिक बंदी जल संकट झेलने के साथ ही फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर है। इससे कई कैदी हड्डियों व पेट संबंधी बीमारियों से ग्रसित हो चुके हैं। इस संबंध में जेल प्रशासन को कैदियों ने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
जिला केंद्रीय कारागृह के दो सौ से अधिक सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदियों को जेल के ट्यूबवैल के फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से भयंकर बीमारियां हो रही है। नाम नहीं छापने की गुहार करते हुए कैदियों ने बताया कि कई वर्षो से जेल में रहते वह फ्लोराइडयुक्त पानी पी रहे हैं। इस कारण उन्हें भोजन नहीं पचता और अल्सर गैस जैसी बीमारियां हो गई है। प्रदूषित पानी पीने से वर्षो से सजा काट रहे कैदियों के दांत व शरीर की हड्डियां भी कमजोर हो गई। आए दिन उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया जाता है।
उधर, जेल प्रशासन का कहना है कि जेल में नए टयूबवैल लगाने के लिए साढे पांच लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। वह राशि जलदाय विभाग को पहुंचा दी गई थी। जलदाय विभाग ने जेल में एक टयूबवैल बोर किया, लेकिन उसमें पानी नहीं निकला तो जलदाय विभाग ने ट्यूबवैल बनाने की राशि काट कर शेष रकम वापस भेज दी, जिसे राजकोष में जमा करा दिया।
बंदियों को जेल में फ्लोराइडयुक्त पानी पिलाने की कई बार जेल प्रशासन के आला अधिकारियों को शिकायत की गई लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका है।
डॉ. राजेंद्र कुमारी, सुपरिटेंडेट जेल, टोंक
कलेक्टर के आदेश पर जलदाय विभाग जेल में तीन टैंकरों से पानी की आपूर्ति कर रहा है। मैं समझता हूं कि शहर का पानी फ्लोराइडयुक्त है। जेल में स्वच्छ पानी के लिए पाइपलाइन डलवाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। —श्रीधर शर्मा जेलर टोंक
जेल व आसपास क्षेत्र के पानी में फ्लोराइड नहीं क्लोराइड (अत्यधिक खारा पानी ) ज्यादा होने से लोगों को हड्डियों संबंधी बीमारी नहीं होती, दस्त लग सकते हैं। अगर जेल परिसर के बाहर से जेल में कनेक्शन ले लिया जाए तो पानी भरपूर मिल सकता है।
—ओपी गोयल, अधिशासी अभियंता जलदाय विभाग टोंक