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सरकार को करोड़ों रुपए लौटाने पड़ेंगे

जयपुर.आबकारी ठेकों में शर्त का उल्लंघन करने के सुनाए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आबकारी विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है। सरकार को लगभग 50 करोड़ रुपए ठेकेदारों को लौटाने पड़ेंगे। फिलहाल इससे बचने के लिए विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में दुबारा सुनवाई के लिए याचिका दाखिल की है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार यह वर्ष 1999-2000 का मामला है। आरक्षित दर कम करने की शर्त का उल्लंघन करने के मामले में हाईकोर्ट की एकल व युगल पीठ ने राज्य सरकार के हक में फैसला दिया। इस पर ठेकेदारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट ने गत दिनों सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया। इसके तहत आबकारी विभाग को करोड़ों रुपए ठेकेदारों को लौटाने पड़ेंगे। विभाग ने दुबारा सुनवाई के लिए याचिका दायर की है।

क्या है मामला

आबकारी नीति के तहत राज्य सरकार ने अजमेर, कोटा, सोजत व रायसिंह नगर में सशर्त ठेकों का उठाव किया था। शर्त के मुताबिक शेष ठेकों में आरक्षित दर कम की गई तो इन चारों ठेकों की राशि भी कम करनी पड़ेगी। आबकारी ठेके नहीं उठने पर सरकार ने अन्य ठेकों की आरक्षित दर कम कर दी। बाद में सरकार ने चारों ठेकों की आरक्षित दर कम करने से इनकार कर दिया। इसमें अजमेर जिले का ठेका करीब 51 करोड़ रुपए, कोटा का करीब 33 करोड़ रुपए, सोजत व रायसिंह नगर के ठेकों की राशि करीब पांच करोड़ रुपए थी।

नहीं मिली नोटशीटराज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान दावा किया था कि इस मामले में किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं हुआ है। इस पर सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज पेश करने को कहा गया, लेकिन विभाग की ओर से कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका। विभागीय सूत्रों के अनुसार फाइल में किसी भी नोटशीट पर यह लिखा हुआ नहीं मिला कि यह शर्त विभाग को मंजूर नहीं है।

सरकार की ओर से पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है। पैसे लौटाने की नौबत नहीं आएगी। आखिर तक कोशिश करेंगे। अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर करेगा।हनुवंतसिंह भाटी, अतिरिक्त आयुक्त, आबकारी विभाग

विभाग ने शर्त का उल्लंघन किया है। अजमेर ठेके में सरकार ने वसूली भी कर ली है। पुनरीक्षण याचिका खारिज होने के बाद राशि लौटानी पड़ेगी। ब्याज सहित क्लेम तैयार कर विभाग को दिया जाएगा। यह राशि करीब 50 करोड़ होगी।

राजेंद्र भंडारी, ठेकेदार राजाराम एवं राजेंद्र भंडारी एंड पार्टी





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