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शिकंजे में आए वाटिका संचालक

उदयपुर. हाई कोर्ट के आदेश के बाद उदयपुर नगर परिषद ने मैरिज पैलेस, वाटिका, हॉल व होटलों में बायलॉज सख्ती से लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है। नए नियमों के तहत झीलों के किनारे वाटिका संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी, जबकि वर्तमान में शहर में कई वाटिकाएं झीलों के किनारे ही स्थित है। लेकसिटी के वाटिका संचालक अब शिकंजे में फंस गए हैं।

हाईकोर्ट ने उदयपुर नगर परिषद द्वारा बनाए बायलॉज राज्य के सभी शहरी निकायों को लागू करने के निर्देश दिए हैं इसलिए परिषद को सख्ती से नियम लागू करने में भी कोई परेशानी नहीं आने वाली है। नगर परिषद आयुक्त महावीर खराड़ी ने कहा कि वर्तमान में शहर में कोई वाटिका नियमों के तहत नहीं चल रही है। अगले एक माह में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर वाटिकाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। इससे वाटिका संचालक नियमों में रहते हुए ही संचालन कर पाएंगे।

ये नहीं चलेगा अब

>> बिना रजिस्ट्रेशन नहीं चलेंगे वाटिका, मैरिज पैलेस, हॉल का रजिस्ट्रेशन
>> झील किनारे नहीं बन सकेगी वाटिका
>> रात भर नहीं बजा सकेंगे साउंड सिस्टम
>> पार्किग की जगह वाटिका के अंदर ही तय करनी होगी
>> सड़क पर पार्किग हुई तो लगेगा जुर्माना
>> सड़क कम चौड़ी हुई तो व्यावसायिक मंजूरी नहीं

वाटिकाओं के लिए बायलॉज हमारी समिति में ही पास हुआ था। हाई कोर्ट में बायलॉज को लागू करने का आदेश देकर अच्छा काम किया है। बायलॉज का पालन होना चाहिए। बायलॉज पास करने से पूर्व हमारी समिति ने शहर में सर्वे किया था, जिसमें शहर में छोटी-बड़ी सभी वाटिकाओं की संख्या 63 थी और बड़ी वाटिकाएं 34 थी।
—दिनेश माली, पूर्व अध्यक्ष, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण समिति, नगर परिषद

शहर में चल रही सभी वाटिकाओं के रजिस्ट्रेशन के लिए सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की जाएगी। नियमानुसार वाटिकाओं का रजिस्ट्रेशन होगा। बायलॉज के अनुसार ही वाटिका संचालन की स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
—महावीर खराड़ी, आयुक्त नगर परिषद, उदयपुर

क्या हैं बायलॉज में..

>> रजिस्ट्रेशन से पूर्व वाटिका संचालक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह जहां पर वाटिका संचालन कर रहा है, उससे किसको हानि नहीं पहुंचे और न ही किसी प्रकार की असुविधा हो।
>> झील के किनारे पर किसी भी वाटिका संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
>> यातायात व्यवस्था के नियंत्रण के लिए जिन वाटिकाओं के समक्ष 30 फीट से कम मार्ग है वहां भूमि का व्यावसायिक भू-रूपांतरण नहीं किया जाएगा।
>> रजिस्ट्रेशन के लिए यातायात विभाग एवं प्रदूषण विभाग का अनापत्ति पत्र प्रस्तुत करना होगा। नवीनीकरण के लिए भी अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
>> ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण बोर्ड, राजस्थान के निर्धारित मानदंडों का पालन करना होगा। शर्र्तो के उल्लंघन पर एक हजार रुपए प्रतिदिन जुर्माना देय होगा तथा परिषद सक्षम न्यायालय में चालान भी प्रस्तुत कर सकेगी।
>> अनुज्ञा पत्र की अवधि प्रथम चरण में अधिकतम एक वर्ष होगी, जो प्रत्येक अवस्था में 31 मार्च को समाप्त हो जाएगी।
>> सार्वजनिक मार्र्गो पर धार्मिक, सामाजिक, क्षैक्षणिक, वाणिज्यिक, विवाह, उत्सव या अन्य प्रयोजनार्थ कोई अस्थाई दरवाजा, पांडाल, पर्दे, वाहन पार्किग या अस्थाई अतिक्रमण नहीं किया जाएगा। पार्किग व्यवस्था भूखंड के अंदर ही सुनिश्चित करनी होगी। वाटिका के कुल क्षेत्रफल में से 10 प्रतिशत भूमि पार्किग के लिए रखनी होगी। उल्लंघन होने पर पांच सौ रुपए प्रतिदिन की दर से जुर्माना वसूला जाएगा।
>> संचालक को आपदा प्रबंधन व बीमा स्वयं के व्यय से कराना होगा।
>> अनुज्ञा पत्र की समयावधि समाप्त होने पर आयुक्त नवीनीकरण के अभाव में पत्र को निरस्त कर देगा।





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